Balochistan Crisis: BLA के हमलों से ग्वादर में चीनी प्रोजेक्ट ठप

Balochistan Crisis
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Balochistan Crisis: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से सामने आ रही खबरें न सिर्फ इस्लामाबाद बल्कि बीजिंग के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लगातार हमलों और बढ़ते प्रभाव के चलते चीन ने ग्वादर में अपने सभी जमीनी प्रोजेक्ट्स को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। यह फैसला चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिसे अब तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” बताया जाता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बलूच विद्रोहियों ने हाल के महीनों में रणनीतिक बढ़त हासिल की है। दावा किया जा रहा है कि BLA के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना को कई इलाकों में पीछे धकेल दिया है और दर्जनों सैन्य शिविरों व चौकियों पर कब्जा कर लिया है। बलूचिस्तान के करीब 10 जिलों में सरकारी नियंत्रण बेहद कमजोर बताया जा रहा है। जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना अपने ही देश के एक बड़े हिस्से में स्थिरता बनाए रखने में संघर्ष करती नजर आ रही है।

चीन के पीछे हटने की वजहें

चीन के इस कदम के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण सुरक्षा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। BLA की ‘मजीद ब्रिगेड’ द्वारा किए गए आत्मघाती हमलों ने चीनी इंजीनियरों, तकनीकी स्टाफ और अधिकारियों में गहरा डर पैदा कर दिया है। बीजिंग को यह एहसास होने लगा है कि पाकिस्तान फिलहाल न तो उसके निवेश की सुरक्षा कर पा रहा है और न ही वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की।

इसके अलावा, CPEC के कई अहम प्रोजेक्ट्स लगातार हमलों, तोड़फोड़ और सप्लाई लाइनों के कटने के कारण ठप पड़ते जा रहे हैं। जिन योजनाओं से पाकिस्तान को आर्थिक संजीवनी मिलने की उम्मीद थी, वही अब उसके लिए एक बड़ी सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौती बन चुकी हैं।

क्यों भड़का बलूचिस्तान का गुस्सा?

बलूचिस्तान में चीन और पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से की जड़ें काफी गहरी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि CPEC और अन्य चीनी प्रोजेक्ट्स ने उनके जीवन को बेहतर बनाने के बजाय और कठिन बना दिया। बलूच समुदाय का कहना है कि उनकी जमीनों पर बड़े प्रोजेक्ट्स तो खड़े कर दिए गए, लेकिन स्थानीय लोगों को न तो रोजगार मिला और न ही बुनियादी सुविधाएं।

ग्वादर के मछुआरों का आरोप है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें समुद्र में जाने से रोका गया, जिससे उनकी आजीविका लगभग खत्म हो गई। वहीं, संसाधनों के बंटवारे को लेकर भी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां चीनी प्रोजेक्ट्स को बिजली और पानी की प्राथमिक आपूर्ति दी गई, वहीं आसपास के गांव अंधेरे और प्यास से जूझते रहे।

सबसे गंभीर आरोप ‘लापता लोगों’ को लेकर हैं। बलूच संगठनों का दावा है कि चीन का विरोध करने वाले कई युवाओं को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गायब कर दिया, जिससे जनता का गुस्सा और अविश्वास लगातार बढ़ता गया।

किन इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब?

रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूचिस्तान के करीब 10 जिले इस समय सबसे ज्यादा अस्थिर माने जा रहे हैं।
ग्वादर और कोस्टल बेल्ट को संकट का केंद्र बताया जा रहा है। यही इलाका चीन के लगभग 62 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट का मुख्य आधार है। यहां चीनी इंजीनियरों पर हुए आत्मघाती हमलों के बाद सभी ग्राउंड ऑपरेशंस रोक दिए गए हैं।

कुछ जिले ऐसे भी बताए जा रहे हैं जहां BLA के मजबूत गढ़ मौजूद हैं और पाकिस्तानी सेना की सप्लाई लाइनों को पूरी तरह बाधित कर दिया गया है। प्राकृतिक गैस से समृद्ध क्षेत्रों में पाइपलाइनों और सरकारी ढांचे पर हमलों से आर्थिक नुकसान और बढ़ गया है। क्वेटा को सिंध से जोड़ने वाले अहम मार्गों पर पुलों और रेल पटरियों को निशाना बनाए जाने से सेना की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।

CPEC के बड़े प्रोजेक्ट्स पर संकट

चीन का पीछे हटना सिर्फ ग्वादर पोर्ट तक सीमित नहीं है।

  • ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: सुरक्षा चिंताओं के चलते इसके संचालन और अंतिम निर्माण कार्य पर रोक लग गई है।

  • सड़क और रेल नेटवर्क (ML-1): CPEC के तहत बनने वाले हाईवे और रेल परियोजनाओं का काम हमलों के डर से ठप है।

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ): जिन इलाकों में फैक्ट्रियां और उद्योग लगने थे, वहां अब सन्नाटा पसरा है क्योंकि चीनी अधिकारी वहां रहने को तैयार नहीं हैं।

पाकिस्तानी सेना के सामने दोहरी चुनौती

पाकिस्तानी सेना के लिए यह संकट सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक भी बन चुका है। सैन्य शिविरों पर हमलों और कब्जे से जवानों का मनोबल गिरा है। चीन का निवेश रुकने से पाकिस्तान के दोबारा आर्थिक डिफॉल्ट के खतरे भी बढ़ गए हैं। स्थानीय आबादी का सेना पर भरोसा लगभग खत्म हो चुका है, जिससे खुफिया जानकारी मिलना भी मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो चीन अपने बचे हुए नागरिकों को निकालने के लिए विशेष इंतजाम कर सकता है। वहीं, पाकिस्तान क्वेटा और आसपास के इलाकों में बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर सकता है, जिससे हालात और बिगड़ने तथा मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप बढ़ने की आशंका है।