जनसंख्या नियंत्रण की चर्चा होते ही अक्सर सख्त कानूनों, सरकारी अभियानों या नीतिगत फैसलों की बात सामने आती है। लेकिन इन तमाम उपायों के बीच एक छोटा-सा उत्पाद है, जो बिना शोर किए दुनिया की आबादी को संतुलन में रखने में अहम भूमिका निभा रहा है—कंडोम। जिस शब्द को सुनते ही कभी सामाजिक झिझक महसूस की जाती थी, वही आज एशिया में अरबों डॉलर के कारोबार का चेहरा बन चुका है। खास बात यह है कि इस बाजार में एक देश ऐसा है, जिसने बिक्री के मामले में सभी को पीछे छोड़ दिया है।
चीन बना एशिया का सबसे बड़ा कंडोम बाजार
अंतरराष्ट्रीय रिसर्च रिपोर्ट्स और व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, एशिया में कंडोम की सबसे ज्यादा खपत चीन में होती है। हर साल चीन में करीब 5.8 अरब यूनिट कंडोम बिकते हैं, जो पूरे एशिया की कुल खपत का बड़ा हिस्सा है। इस लिस्ट में भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि तुर्की तीसरे नंबर पर आता है। हालांकि, चीन और भारत के आंकड़ों के बीच का अंतर अब भी काफी बड़ा है।
मार्केट वैल्यू और ग्रोथ
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में चीन का कंडोम बाजार करीब 3.69 बिलियन डॉलर (लगभग 30,000 करोड़ रुपये) का था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार 7.24 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सेक्टर करीब 10% की सालाना ग्रोथ (CAGR) से आगे बढ़ रहा है, जो कई दूसरे FMCG प्रोडक्ट्स से कहीं ज्यादा तेज़ है।
आखिर क्यों इतनी तेजी से बढ़ा यह बाजार?
चीन में कंडोम की जबरदस्त बिक्री के पीछे कई ठोस कारण हैं:
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विशाल आबादी: चीन की आबादी लगभग 1.4 अरब है, जिसमें से करीब 60 करोड़ लोग यौन रूप से सक्रिय आयु वर्ग में आते हैं।
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सरकारी जागरूकता अभियान: चीनी सरकार ने यौन स्वास्थ्य और यौन संचारित रोगों (STDs) से बचाव के लिए कंडोम को जरूरी हेल्थ प्रोडक्ट के रूप में प्रमोट किया है।
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सामाजिक सोच में बदलाव: बेहतर सेक्स एजुकेशन, शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के चलते कंडोम खरीदने को लेकर पहले जैसी झिझक अब काफी कम हो गई है।
ब्रांड्स, क्वालिटी और आयात
चीन के कंडोम बाजार में 85% से ज्यादा हिस्सेदारी लेटेक्स कंडोम की है। यहां ओकामोटो (Okamoto), सागामी (Sagami) और इलासुन जैसे ब्रांड्स को सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। दिलचस्प यह भी है कि चीन अपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए थाईलैंड, जापान और मलेशिया जैसे देशों से बड़ी मात्रा में कंडोम आयात करता है।
भारत के लिए क्या है सीख?
भारत एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कंडोम बाजार जरूर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी इसे खरीदने को लेकर सामाजिक संकोच बना हुआ है। हालांकि, सरकारी योजनाओं, मुफ्त वितरण कार्यक्रमों और सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति जागरूकता अभियानों के चलते भारत में भी यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा और जागरूकता पर और जोर दिया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में चीन को कड़ी टक्कर दे सकता है।

