America Iran War: रुबियो बोले—हफ्तों में खत्म हो सकता है अभियान

America Iran War
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America Iran War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अहम बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यह संघर्ष लंबा नहीं खिंचेगा और अमेरिकी सैन्य अभियान “महीनों नहीं बल्कि हफ्तों” में समाप्त हो सकता है। हालांकि, उनके इस दावे के बावजूद जमीनी हालात अब भी बेहद जटिल और संवेदनशील बने हुए हैं।

रुबियो ने फ्रांस में आयोजित G7 देशों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को तय समय सीमा के भीतर हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका का इरादा बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध छेड़ने का नहीं है। उनके अनुसार, मौजूदा सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से सीमित दायरे में रखी गई है और तकनीकी व हवाई क्षमताओं के जरिए लक्ष्यों को साधा जा रहा है।

हालांकि, इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने एहतियात के तौर पर मिडिल ईस्ट में सैनिकों की तैनाती बढ़ानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को क्षेत्र में भेजा जा रहा है। मार्च के अंत तक पहला सैन्य दल एक बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए पहुंचने वाला है। इस कदम को इस रूप में देखा जा रहा है कि अमेरिका किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है।

एक तरफ जहां अमेरिका जमीनी युद्ध से बचने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान की ओर से अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों पर हमले जारी हैं। हाल ही में सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इस हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें दो की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। इसके अलावा, कई सैन्य विमानों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे अमेरिकी सैन्य क्षमताओं पर असर पड़ा है।

इस बीच, अमेरिका की ओर से कूटनीतिक दबाव भी बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए 10 दिनों की सख्त समय सीमा दी है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा गया है। इस प्रस्ताव में ईरान से यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को रोकने और मिसाइल विकास पर नियंत्रण लगाने जैसी अहम शर्तें रखी गई हैं। हालांकि, अब तक ईरान की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

युद्ध के मानवीय और सैन्य नुकसान भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ईरान में अब तक 1900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20,000 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं, अमेरिकी पक्ष की बात करें तो 300 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं और कम से कम 13 सैनिकों की जान जा चुकी है। ये आंकड़े इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाते हैं।

इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक उसकी लगभग एक-तिहाई मिसाइल क्षमता ही नष्ट की जा सकी है। इसका मतलब है कि ईरान के पास अब भी जवाबी कार्रवाई करने की पर्याप्त ताकत मौजूद है, जो आने वाले दिनों में संघर्ष को और बढ़ा सकती है।

कुल मिलाकर, भले ही अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस अभियान के जल्द खत्म होने की उम्मीद जताई हो, लेकिन जमीनी स्थिति और दोनों पक्षों की आक्रामक रणनीतियां यह संकेत देती हैं कि यह टकराव अभी और खिंच सकता है। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होंगे या मिडिल ईस्ट एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।