EVTOL Aircraft: भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत हवाई यात्रा बाजारों में से एक बन सकता है। यह दावा ब्रिटेन की अग्रणी एयरोस्पेस कंपनी वर्टिकल एयरोस्पेस ने किया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) स्टुअर्ट सिंपसन के अनुसार, भारत की विशाल जनसंख्या, तेज़ आर्थिक वृद्धि और बड़े शहरों में बढ़ती यातायात समस्या वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (EVTOL) विमानों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है।
सिंगापुर एयरशो-2026 में तीन से आठ फरवरी के बीच भाग लेने के बाद स्टुअर्ट सिंपसन ने यह विचार साझा किए। एक ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भले ही दीर्घकालिक पूर्वानुमान लगाना कठिन हो, लेकिन भारत में EVTOL तकनीक के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक देश के शहरी परिवहन परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है।
क्या हैं EVTOL विमान और क्यों हैं खास?
EVTOL यानी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग विमान ऐसे उन्नत हवाई वाहन हैं, जिन्हें उड़ान भरने और उतरने के लिए पारंपरिक लंबे रनवे की आवश्यकता नहीं होती। ये हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ान भर सकते हैं, हवा में स्थिर रह सकते हैं और सीमित स्थान पर सुरक्षित लैंडिंग कर सकते हैं। साथ ही, ये इलेक्ट्रिक होने के कारण कम शोर करते हैं और पर्यावरण के लिए भी अधिक अनुकूल माने जाते हैं।
स्टुअर्ट सिंपसन ने कहा कि भारत जैसे देश के लिए, जहां महानगरों में ट्रैफिक जाम एक गंभीर समस्या है, EVTOL विमान एक क्रांतिकारी समाधान साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत EVTOL तकनीक के लिए एक स्वाभाविक परीक्षण स्थल है। यहां की बड़ी आबादी, युवा जनसांख्यिकी, बढ़ती आय, तेज आर्थिक विकास और शहरी यातायात संकट इस तकनीक को अपनाने के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाते हैं।”
कई क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग
सिंपसन के अनुसार, भारत में EVTOL विमानों का उपयोग केवल शहरी परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। इनका इस्तेमाल हवाईअड्डों और शहरों के बीच तेज़ कनेक्टिविटी, अंतर-शहरी गलियारों, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, माल ढुलाई, आपदा प्रबंधन और रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इससे समय की बचत के साथ-साथ मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव भी कम होगा।
‘वालो’ विमान और शून्य उत्सर्जन
वर्टिकल एयरोस्पेस का प्रमुख उत्पाद ‘वालो’ एक पायलट द्वारा संचालित, चार सीटों वाला इलेक्ट्रिक EVTOL विमान है। कंपनी का दावा है कि यह विमान संचालन के दौरान शून्य कार्बन उत्सर्जन करता है। सिंपसन के मुताबिक, ‘वालो’ भारत की शहरी भीड़भाड़ से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और घंटों की सड़क यात्रा को मिनटों की हवाई यात्रा में बदल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत में हवाई पर्यटन, दर्शनीय स्थल भ्रमण, बड़े खेल आयोजनों जैसे क्रिकेट मैचों और फिल्म समारोहों के दौरान विशेष परिवहन सेवाओं के लिए भी ‘वालो’ विमानों की मांग बढ़ सकती है।
भारतीय कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी
भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए वर्टिकल एयरोस्पेस ने भारतीय निजी विमानन कंपनी जेटसेटगो के साथ एक अहम कदम उठाया है। दोनों कंपनियों के बीच 50 ‘वालो’ EVTOL विमानों की संभावित खरीद को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही भारत में उन्नत हवाई यात्रा यानी एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (AAM) सेवाओं को विकसित करने के लिए रणनीतिक सहयोग पर भी सहमति बनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियामक ढांचा, बुनियादी ढांचा और सुरक्षा मानक समय पर विकसित होते हैं, तो EVTOL विमान भारत की परिवहन प्रणाली में एक नया अध्याय जोड़ सकते हैं।

