नई दिल्ली, बचपन के कैंसर को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के उपमहानिदेशक (डीडीजीएचएस) डॉ. एल. स्वस्तिचरण ने कहा कि सरकार वर्ष 2030 तक बचपन के कैंसर में 60 प्रतिशत सर्वाइवल रेट हासिल करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस (15 फरवरी) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “हमें किसी भी बच्चे को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। सभी बच्चों को स्वस्थ होकर ‘विकसित भारत 2047’ के सपने में योगदान देना चाहिए।”
अलग नीति नहीं, लेकिन मौजूदा ढांचा पर्याप्त
डॉ. स्वस्तिचरण ने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार पूर्ण सहयोग देगी, जिसमें नवोन्मेषी वित्तीय मॉडल भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि भले ही बचपन के कैंसर के लिए अलग से कोई राष्ट्रीय नीति नहीं है, लेकिन वर्तमान स्वास्थ्य ढांचे में ऐसे कार्यक्रमों को समायोजित करने की पर्याप्त गुंजाइश है, जिससे कैंसर से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के तहत उपचार और आर्थिक सहायता मिल सके।
उन्होंने 9 राज्यों द्वारा बचपन के कैंसर को प्राथमिकता देने के लिए किए गए समझौतों (MoUs) की सराहना की और राज्यों से सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
2019 से अब तक दोगुनी हुई इलाज तक पहुंच
कैनकिड्स किड्सकैन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
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2019–20 में इलाज तक पहुंच 27% थी,
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जो 2025 में बढ़कर 54% से अधिक हो गई है।
अब लक्ष्य है:
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100% इलाज तक पहुंच
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100% वित्तीय सुरक्षा
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2030 तक 60% सर्वाइवल रेट
यह लक्ष्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर चाइल्डहुड कैंसर के अनुरूप है।
सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत
एम्स (AIIMS) के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. समीर बक्शी ने कहा कि बचपन के कैंसर के अधिक से अधिक मामलों की पहचान करना राष्ट्रीय सर्वाइवल रेट को 50% से बढ़ाकर 60% तक ले जाने की दिशा में अहम कदम है।
उन्होंने कहा, “सरकारी व्यवस्था में सुधार हुआ है और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना भी कैंसर के इलाज में सहयोग दे रही है, लेकिन अब जरूरत है कि सभी हितधारक एक परिवार की तरह मिलकर काम करें।”
उन्होंने सिस्टम में बिखराव (fragmentation) को खत्म कर बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।
नीति समन्वय और जागरूकता पर जोर
आईसीएमआर सेंट्रल एथिक्स कमेटी की सदस्य और चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल की डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र प्रतिनिधि पूनम बगई ने संवाद, समाधान और नीति एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि नवगठित तकनीकी विशेषज्ञ समूह (Technical Expert Group) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कैनकिड्स किड्सकैन की संस्थापक चेयरमैन और पेलियम इंडिया की वाइस चेयरमैन पूनम बगई ने कहा, “हम चाहते हैं कि समाज यह विश्वास करे कि कैंसर का इलाज संभव है। भले ही हम निम्न आय वाला देश हों, लेकिन हमने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।”
समाज और संस्थानों का समर्थन
कार्यक्रम में पंजाब के पूर्व आईएएस अधिकारी करण अवतार सिंह, सीएसआर कानून विशेषज्ञ निखिल पंत और बैंकर पियूष गुप्ता ने भी सिस्टम और संसाधनों को मजबूत करने का समर्थन किया।
इस अवसर पर चाइल्डहुड कैंसर सर्वाइवर्स एक्सीलेंस अवॉर्ड्स डॉ. तनवीर अहमद और एशियन यूथ पदक विजेता स्पोर्ट्स क्लाइंबर शिवानी चरक को प्रदान किए गए।
निष्कर्ष:
सरकार, चिकित्सा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से बचपन के कैंसर के इलाज और जागरूकता में तेजी आई है। 2030 तक 60% सर्वाइवल रेट का लक्ष्य न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

