Gold Price Forecast: UBS का अनुमान, 2026 तक 6200 डॉलर पहुंच सकता है सोना

Gold Rate Today
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Gold Price Forecast: सोने की कीमतों को लेकर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जब निवेशकों के एक बड़े वर्ग को लगने लगा था कि सोने की हालिया तेज रैली अब थम सकती है और आगे सीमित दायरे में ही कारोबार रहेगा, उसी वक्त ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS की ताजा रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। UBS का मानना है कि सोने का बुल-मार्केट अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में इसकी कीमतें मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकती हैं।

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के मध्य तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 6,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह स्तर मौजूदा कीमतों से लगभग 25 फीसदी ज्यादा है। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के हफ्तों में जो गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, उसे लंबी तेजी के ट्रेंड का अंत नहीं माना जाना चाहिए। इसे केवल एक अस्थायी करेक्शन के तौर पर देखा जाना चाहिए, जो किसी भी मजबूत बुल-मार्केट का स्वाभाविक हिस्सा होता है।

क्यों आई हालिया गिरावट?

रिपोर्ट में बताया गया है कि हालिया दबाव की कई वजहें रही हैं। सबसे पहले, तेज रैली के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) की, जिससे कीमतों पर दबाव आया। इसके अलावा, मार्जिन कॉल्स ने भी कई लीवरेज्ड पोजिशन वाले निवेशकों को मजबूरी में बिकवाली करने पर मजबूर किया। डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी अल्पकालिक रूप से सोने की चाल को प्रभावित किया।

हालांकि UBS का साफ कहना है कि यह गिरावट ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं है। ब्रोकरेज के मुताबिक, जब मजबूर विक्रेता बाजार से बाहर हो जाते हैं, तो कीमतें धीरे-धीरे स्थिर होती हैं और फिर मूलभूत कारकों के आधार पर आगे बढ़ती हैं।

लंबी अवधि में क्यों मजबूत है सोना?

UBS का मानना है कि सोने के पक्ष में लंबी अवधि के कई मजबूत फैक्टर काम कर रहे हैं। सबसे अहम कारण है केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी। पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है, जिससे सोने की मांग को मजबूत आधार मिला है।

इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मंदी की आशंका, बढ़ता कर्ज और भू-राजनीतिक तनाव भी सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प बनाते हैं। जब भी दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से निकलकर सोने की ओर रुख करते हैं। UBS का कहना है कि यही कारण है कि सोना आने वाले वर्षों में भी निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभाता रहेगा।

चांदी पर UBS की चेतावनी

जहां सोने को लेकर UBS का रुख सकारात्मक है, वहीं चांदी के मामले में ब्रोकरेज थोड़ा सतर्क नजर आता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में एक ही दिन में तेज गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में भी चांदी पर भारी दबाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

UBS का कहना है कि फिलहाल चांदी में उतार-चढ़ाव का जोखिम ज्यादा है। इसकी कीमतें इंडस्ट्रियल डिमांड, आर्थिक ग्रोथ और सट्टेबाजी से ज्यादा प्रभावित होती हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक अगर चांदी में निवेश करना चाहते हैं, तो उन्हें बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।

आगे कैसी रह सकती है चाल?

UBS के मुताबिक, सोने की तेजी का मौजूदा चक्र अब अपने मध्य से अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। इस दौरान नए रिकॉर्ड बन सकते हैं, लेकिन बीच-बीच में 5 से 8 फीसदी तक की गिरावट आना बिल्कुल सामान्य होगा। ब्रोकरेज ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे मौजूदा उतार-चढ़ाव को लंबी गिरावट की शुरुआत मानकर घबराएं नहीं।

रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है—सोने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अल्पकालिक अस्थिरता भले ही बनी रहे, लेकिन लंबी अवधि में मजबूत बुनियादी कारक सोने को ऊंचे स्तरों तक ले जा सकते हैं।