भारत में सोलर ऊर्जा क्षमता तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इसी के साथ सोलर पावर प्लांट मालिकों की परेशानियां भी सामने आ रही हैं। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि अपर्याप्त ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) और अविश्वसनीय इंस्टॉलेशन प्रथाओं के कारण देशभर में कई सोलर प्लांट मालिक बिजली उत्पादन और राजस्व में भारी नुकसान झेल रहे हैं।
हालांकि सोलर पावर प्लांट को कम रखरखाव वाला और दीर्घकालिक निवेश बताया जाता है, लेकिन सेक्टर से जुड़े पेशेवरों का मानना है कि नियमित सर्विसिंग और निगरानी के अभाव में सालाना बिजली उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसका सीधा असर प्रोजेक्ट की आर्थिक स्थिरता और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न (ROI) पर पड़ता है।
रखरखाव की अनदेखी से घटता है बिजली उत्पादन
सोलर मॉड्यूल भले ही मजबूत होते हैं, लेकिन वे लगातार धूल, प्रदूषण, गर्मी, नमी और इलेक्ट्रिकल तनाव के संपर्क में रहते हैं। यदि समय-समय पर सफाई, निरीक्षण और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस न किया जाए, तो उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, गंदे पैनल, इन्वर्टर का बार-बार ट्रिप होना, ढीले इलेक्ट्रिकल कनेक्शन, अर्थिंग फॉल्ट और सिस्टम में आई खराबियां अक्सर महीनों तक पकड़ में नहीं आतीं, जब तक कि उचित O&M व्यवस्था मौजूद न हो।
ऊर्जा क्षेत्र के एक विश्लेषक ने बताया,
“इन्वर्टर का थोड़े समय के लिए बंद होना या पैनलों की सफाई न होना भी मापने योग्य राजस्व नुकसान का कारण बन सकता है, खासकर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के लिए।”
कमीशनिंग के बाद गायब हो रहे इंस्टॉलर
सोलर प्लांट मालिकों के अनुसार, इससे भी बड़ी समस्या उन EPC कंपनियों की है जो प्लांट स्थापित करने के तुरंत बाद बाजार से गायब हो जाती हैं। प्रोजेक्ट हैंडओवर के बाद कई कंपनियां पोस्ट-इंस्टॉलेशन सपोर्ट देने में विफल रहती हैं, जिससे मालिकों को तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स और वारंटी क्लेम में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इसके परिणामस्वरूप:
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मॉनिटरिंग सिस्टम काम करना बंद कर देते हैं
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छोटी खराबियां बड़ी तकनीकी विफलताओं में बदल जाती हैं
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वारंटी क्लेम प्रक्रिया जटिल हो जाती है
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प्लांट मालिकों को महंगे थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स पर निर्भर होना पड़ता है
इंडस्ट्री में ऐसे प्लांट्स को “ऑर्फन सोलर प्लांट” कहा जाता है, जो अपनी डिजाइन क्षमता से काफी कम उत्पादन करते हैं और लंबे समय तक बंद रहने के कारण लगातार वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं।
प्रतिष्ठित और भरोसेमंद इंस्टॉलर क्यों जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर निवेश को उसके पूरे जीवनचक्र में सुरक्षित रखने के लिए एक प्रतिष्ठित, आर्थिक रूप से स्थिर और अनुभवी इंस्टॉलर का चयन बेहद जरूरी है।
कम लागत पर काम करने वाली कई EPC कंपनियां बाजार में प्रवेश तो कर लेती हैं, लेकिन कुछ समय बाद अपना संचालन बंद कर देती हैं या फोकस बदल लेती हैं। ऐसे में ग्राहक तकनीकी और आर्थिक दोनों स्तरों पर नुकसान झेलते हैं। इंस्टॉलर के गायब होने से न सिर्फ तकनीकी समस्याएं बढ़ती हैं, बल्कि बिजली उत्पादन में कमी के कारण ROI की अवधि भी साल-दर-साल लंबी होती जाती है।
एक भरोसेमंद इंस्टॉलर यह सुनिश्चित करता है:
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सही सिस्टम डिजाइन और कंपोनेंट का चयन
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उपयुक्त इन्वर्टर साइजिंग और केबलिंग मानक
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मजबूत अर्थिंग और सुरक्षा व्यवस्था
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प्रशिक्षित स्टाफ के साथ दीर्घकालिक सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर
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वारंटी सपोर्ट और मैन्युफैक्चरर से समन्वय
एक वरिष्ठ नवीकरणीय ऊर्जा सलाहकार ने कहा,
“सोलर 25 साल का एसेट होता है। अगर इंस्टॉलर दो साल में गायब हो जाए, तो ग्राहक को अगले 23 साल उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। किसी भरोसेमंद कंपनी के साथ थोड़ा ज्यादा शुरुआती खर्च अक्सर पूरे जीवनकाल में कई गुना बचत करता है।”
भरोसेमंद इंस्टॉलेशन पार्टनर का महत्व
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि क्वालिटी इंस्टॉलेशन, नियमित मेंटेनेंस जितना ही महत्वपूर्ण है। खराब डिजाइन, गलत इन्वर्टर साइजिंग, घटिया केबलिंग और कमजोर अर्थिंग जैसी गलतियां ऐसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं, जो पूरे प्लांट जीवनकाल में बनी रहती हैं।
एक वरिष्ठ सोलर कंसल्टेंट ने कहा,
“मेंटेनेंस खराब इंस्टॉलेशन की भरपाई नहीं कर सकता। शुरुआत में ही एक अनुभवी और भरोसेमंद EPC पार्टनर का चयन स्थिर उत्पादन और अनुमानित रिटर्न के लिए बेहद जरूरी है।”
Jetsor Power Systems ने बताया लापरवाही का आर्थिक असर
जब इस संवाददाता ने सोलर प्लांट ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी कंपनी Jetsor Power Systems Pvt Ltd के एक प्रतिनिधि से बात की, तो उन्होंने लापरवाही के वित्तीय प्रभाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
उन्होंने कहा,
“नियमित और प्रोफेशनल मेंटेनेंस के अभाव में सोलर प्लांट मालिकों को लगातार उत्पादन हानि, इन्वर्टर फेल्योर और प्रमुख कंपोनेंट्स के तेजी से खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में यह नुकसान तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन समय के साथ यह लाखों या करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान में बदल जाता है। भरोसेमंद पार्टनर द्वारा सही इंस्टॉलेशन और निरंतर O&M ही सोलर निवेश को सुरक्षित रख सकता है।”
प्रोफेशनल O&M सेवाओं की बढ़ती जरूरत
चूंकि सोलर प्लांट्स से 20 से 25 साल तक संचालन की उम्मीद की जाती है, इसलिए इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोफेशनल O&M सेवाएं और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अब प्लांट मालिक ऐसे सर्विस प्रोवाइडर्स की तलाश में हैं जो नियमित निरीक्षण, परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें।
जैसे-जैसे सोलर सेक्टर परिपक्व हो रहा है, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इसकी सफलता केवल क्षमता बढ़ाने से नहीं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन, भरोसेमंद इंस्टॉलर और दीर्घकालिक सर्विस सपोर्ट पर निर्भर करेगी।

