स्मॉल फाइनेंस बैंक बने सबसे बड़े जॉब (Jobs) मेकर, प्राइवेट दिग्गज पीछे

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Banking News: देश के बैंकिंग सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां कई बैंकों का विलय हुआ और कुछ बैंक आकार के लिहाज से कॉरपोरेट दिग्गजों को चुनौती देने लगे, वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) की एंट्री ने पूरी तस्वीर बदल दी है। एक समय छोटे खिलाड़ियों के तौर पर देखे जाने वाले SFBs अब रोजगार सृजन में बड़े बैंकों को भी पीछे छोड़ रहे हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने भर्ती के मामले में रिकॉर्ड बनाया। इन बैंकों ने 26,736 नई नौकरियां दीं — जो पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक है। इसके उलट, बड़े प्राइवेट बैंकों में तस्वीर उलटी रही। जहां FY22 से FY24 तक वे हर साल 75,000 से 1 लाख लोगों की भर्ती कर रहे थे, वहीं FY25 में उनके कुल कर्मचारियों की संख्या 7,257 घट गई। नतीजा यह हुआ कि SFBs बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े जॉब क्रिएटर बनकर उभरे।

हालांकि कुल बैंकिंग सिस्टम में उनकी हिस्सेदारी अभी भी लगभग 1% से थोड़ी ज्यादा है, लेकिन विकास की गति प्रभावशाली रही है। FY20 से FY25 के बीच SFBs के लोन में करीब 25% और डिपॉजिट में लगभग 34% की वृद्धि दर्ज हुई। इसी अवधि में पूरे बैंकिंग सिस्टम की लोन और डिपॉजिट ग्रोथ औसतन 11–13% के बीच रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि आक्रामक भर्ती का सीधा संबंध विस्तार योजनाओं से है। ये बैंक अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को गहराई तक ले जाने, नई शाखाएँ खोलने और बैलेंस शीट मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं। कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ सर्वजीत सिंह समरा के अनुसार, यह तेज़ी किसी अस्थायी चक्र का हिस्सा नहीं बल्कि एक “स्ट्रक्चरल ट्रेंड” है। असेट क्वालिटी और गवर्नेंस बेहतर होने के बाद SFBs अब सब-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

पिछले पाँच वर्षों में इनके कर्मचारियों की संख्या FY20 के 95,249 से बढ़कर FY25 में लगभग 1.8 लाख हो गई — यानी औसतन 13.3% वार्षिक वृद्धि। इसके मुकाबले पूरे बैंकिंग सेक्टर में कर्मचारियों की ग्रोथ मात्र 4.3% रही, जबकि सरकारी बैंकों में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल देश में कुल बैंक कर्मचारियों की संख्या लगभग 18.1 लाख है।

दिलचस्प बात यह है कि कई स्मॉल फाइनेंस बैंक अब यूनिवर्सल बैंक बनने की तैयारी में हैं। नियामकीय मंज़ूरी से पहले ही वे अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रहे हैं। हाल ही में RBI ने AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को यूनिवर्सल बैंक में बदलने की अनुमति दी है। उज्जीवन, जना और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक भी इस श्रेणी का लाइसेंस हासिल करने के प्रयास में जुटे हैं।

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौजूदा रफ्तार जारी रही, तो SFBs न केवल वित्तीय समावेशन को तेज़ करेंगे बल्कि अगले कुछ वर्षों में ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में रोजगार के प्रमुख स्रोत भी बन सकते हैं।