इंदौर में हुई हार्टिकल्चर क्लस्टर विकास बैठक: बागवानी उत्पादों की गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और विपणन को नई दिशा

Officials and farmers attending the Horticulture Cluster Development Meeting at Zila Panchayat office in Indore.
Participants during the Horticulture Cluster Development Meeting at the Zila Panchayat office, Indore, discussing strategies for improving quality, value addition, and market linkages of horticultural produce.

 इंदौर में बागवानी विकास को मिला नया आयाम

इंदौर, मध्य प्रदेश – जिले में बागवानी क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से हार्टिकल्चर क्लस्टर विकास बैठक का आयोजन जिला पंचायत सभाकक्ष में किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने की, जबकि जिला कृषि स्थाई समिति के अध्यक्ष दिनेश कंचनसिंह चौहान मुख्य अतिथि रहे। यह बैठक राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के हार्टिकल्चर क्लस्टर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य बागवानी उत्पादों की गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और विपणन तंत्र को मजबूत बनाना है।

बैठक में हुई व्यापक चर्चा

बैठक में संयुक्त संचालक उद्यान विभाग इंदौर, उप संचालक नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड भोपाल, मंडी व्यापारी, एसोसिएशन सदस्य, विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि और जिले के प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के तहत “मल्टी-कमोडिटी हाई वैल्यू क्लस्टर” और “पैरी-अर्बन क्लस्टर” विकसित करने पर विशेष फोकस रहा। इन क्लस्टरों के माध्यम से स्थानीय बागवानी उत्पादों के उत्पादन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और विपणन को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

 किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाना है। इसके लिए किसानों को संगठित कर FPOs (Farmer Producer Organizations) और FPCs (Farmer Producer Companies) के रूप में जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम के तहत पात्र संगठनों, सहकारी समितियों और निजी भागीदारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिनका फार्मगेट मूल्य 100 करोड़ रुपये तक हो। ये संस्थाएं उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी मूल्य श्रृंखला में भूमिका निभा सकेंगी।

 क्लस्टर विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

इंदौर जिला लंबे समय से फल, सब्जी और फूलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। हार्टिकल्चर क्लस्टर कार्यक्रम से इन उत्पादों को बेहतर बाजार और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी।
संयुक्त संचालक उद्यान विभाग ने बताया कि “क्लस्टर विकास से किसानों को न केवल स्थानीय बाजार बल्कि निर्यात के अवसर भी मिलेंगे। इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।”

विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजय मिश्रा ने कहा, “इंदौर का भौगोलिक और जलवायु परिवेश विविध बागवानी उत्पादों के लिए बेहद अनुकूल है। यदि क्लस्टर मॉडल को व्यवस्थित रूप से लागू किया जाए, तो किसान सीधे मूल्य श्रृंखला में जुड़कर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कार्यक्रम के साथ कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स और डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का एकीकृत विकास किया जाए, ताकि उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार तक पहुँच दोनों में सुधार हो।

पारदर्शिता और सहभागिता पर जोर

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि क्लस्टर विकास से जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी दी जाएगी, जिससे वे आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाकर उत्पादकता बढ़ा सकें।
इच्छुक किसान और संगठन उप संचालक उद्यान कार्यालय, चिड़ियाघर के पास, ए.बी. रोड, इंदौर में संपर्क कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड जल्द ही विभागीय वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएंगे।

बागवानी क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार

इंदौर में आयोजित यह बैठक बागवानी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। हार्टिकल्चर क्लस्टर विकास कार्यक्रम के माध्यम से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, निर्यात क्षमता और ग्रामीण रोजगार में भी विस्तार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करती हैं, तो आने वाले वर्षों में इंदौर मध्य भारत का प्रमुख बागवानी हब बन सकता है।