चंडीगढ़: हरियाणा में खरीफ फसलों की खरीद सीजन 2025-26 किसानों के लिए रिकॉर्ड रहा है। राज्य सरकार ने अब तक 543.66 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान सुनिश्चित हुआ है और किसानों को समय पर आर्थिक राहत मिली है। इस साल धान की खरीद ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से की जा रही है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और डिजिटल हुई है।
63,356 किसानों से हुई धान की खरीद
हरियाणा में इस खरीफ सीजन में अब तक कुल 63,356 किसानों से धान खरीदा गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है। “इस बार सरकार ने डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी है। इससे किसानों को पैसे समय पर मिल रहे हैं और फसल बेचने में परेशानी नहीं आ रही है,” उन्होंने कहा।
किसानों के लिए यह कदम बहुत मायने रखता है, क्योंकि कई बार मँडी में फसल बेचने के दौरान भुगतान में देरी होती थी। अब डिजिटल माध्यम से MSP का भुगतान सुनिश्चित हो गया है।
कुल आवक और उठान की स्थिति
हरियाणा के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार, राज्य भर की मंडियों में अब तक कुल 8,92,943.07 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इस आवक में से 3,10,821.24 मीट्रिक टन का उठान हो चुका है। कुल मिलाकर 7,20,025.68 मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी हो चुकी है।
प्रवक्ता ने बताया कि इस बार धान की खरीद सामान्य समय से पहले शुरू की गई थी, जिससे किसानों को फसल बेचने में सुविधा मिली। उन्होंने कहा, “खरीफ सीजन में इतनी बड़ी संख्या में धान की खरीद इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।”
विभागों का योगदान और खरीद का रिकॉर्ड
इस खरीफ सीजन में सबसे अधिक धान की खरीद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से की गई है। अब तक इस विभाग ने 4,25,680.39 मीट्रिक टन धान खरीदी है। वहीं, हरियाणा राज्य कृषि विपणन मंडी समिति (हैफेड) ने 2,09,796.67 मीट्रिक टन और हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने 84,548.61 मीट्रिक टन धान खरीदा है।
विशेषज्ञ की राय: कृषि विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार का कहना है, “इस तरह की व्यवस्थित खरीद से किसानों में भरोसा बढ़ता है। डिजिटल भुगतान और MSP सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। यह राज्य के किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
किसानों के लिए दिशा-निर्देश
प्रवक्ता ने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसल मंडियों में भेजने से पहले अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके लाएं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार धान की नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सरकारी खरीद एजेंसियों ने यह सुनिश्चित किया है कि मंडियों में धान की खरीद और उठान सुचारू रूप से हो। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि धान उठाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो।
खरीद की शुरुआत 22 सितंबर से
इस वर्ष धान की खरीद 22 सितंबर से शुरू कर दी गई थी। खरीफ फसल की मांग के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया। अधिकारी बताते हैं कि कई मंडियों में खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन कुछ मंडियों में नमी के कारण धान बेचने में किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
एक किसान, रामफल यादव, ने कहा, “इस बार सरकार ने हमें फसल बेचने के लिए जल्दी ही मौका दिया। पहले कुछ वर्षों में हमें भुगतान में देरी और फसल उठाने में कठिनाई होती थी, लेकिन इस बार सब कुछ समय पर और पारदर्शी तरीके से हो रहा है।”
राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान
हरियाणा सरकार की इस योजना का राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। धान की खरीद और MSP भुगतान से किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। यह कदम राज्य के कृषि क्षेत्र को स्थिरता और विश्वास प्रदान करता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खरीदी गई धान की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और खरीफ फसलों की बिक्री को सुचारू बनाने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए हैं।
खरीफ 2025-26 में हरियाणा सरकार द्वारा अपनाई गई खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए लाभकारी साबित हुई है। डिजिटल भुगतान, पारदर्शी MSP नीति, और त्वरित उठान ने किसानों के हितों को सुरक्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की योजनाओं से कृषि क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और किसानों का विश्वास दोनों मजबूत होंगे। इस खरीफ सीजन की सफलता यह संदेश देती है कि जब राज्य सरकार और किसान मिलकर काम करते हैं, तो कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास दोनों सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

