लद्दाख में अशांति के बीच सोनम वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द

लद्दाख में अशांति के बीच सोनम वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द
लद्दाख में अशांति के बीच सोनम वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द

Ladakh protests : लद्दाख में बढ़ते विरोध और हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षाविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े दो संगठनों का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय ने 25 सितंबर को यह कदम उठाते हुए कहा कि दोनों एनजीओ – स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) – ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का बार-बार उल्लंघन किया है।

क्यों रद्द हुआ लाइसेंस?

गृह मंत्रालय ने एफसीआरए की धारा 17 और 18 के तहत गंभीर गड़बड़ियों का हवाला दिया है। सीबीआई की जांच में सामने आया कि विदेशी दान का उपयोग “राष्ट्रीय हित के विरुद्ध” गतिविधियों में किया गया। एक उदाहरण में स्वीडन से आए ₹4.93 लाख का इस्तेमाल संप्रभुता और प्रवासन से जुड़े अध्ययनों पर किया गया, जिसे मंत्रालय ने अस्वीकार्य माना।

इसके अलावा, वित्तीय रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां मिलीं – जैसे एक पुरानी बस बेचकर ₹3.5 लाख एफसीआरए खाते में डालना और वांगचुक द्वारा दिया गया कथित “व्यक्तिगत दान” जो आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं था। वांगचुक का कहना है कि यह सब पारदर्शी लेन-देन थे, लेकिन मंत्रालय ने इन्हें नियमों का उल्लंघन माना।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और लद्दाख की स्थिति

Laddakh mai Pradrshan

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। 24 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और सरकारी दफ्तरों पर हमला हुआ।

केंद्र सरकार का आरोप है कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और उनके बयानों ने युवाओं को भड़काया। वांगचुक का तर्क है कि जनता का गुस्सा सरकार की बेरुखी और रोजगार संकट से उपजा है।

सरकार की पहल और संवाद की कोशिश

केंद्र ने साफ किया है कि लद्दाख में संवाद और विकास की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) का गठन किया गया है, जो स्थानीय संगठनों जैसे एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) से लगातार बातचीत कर रही है।

अब तक सरकार ने कई कदम उठाए हैं:

  • अनुसूचित जनजाति आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% करना

  • स्थानीय परिषदों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण

  • भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक दर्जा देना

  • 1,800 नई सरकारी नौकरियों को मंजूरी देना

एचपीसी की अगली बैठक 6 अक्टूबर को होनी है, जो आने वाले हालात की दिशा तय कर सकती है।

सक्रियता बनाम जवाबदेही

सोनम वांगचुक अपने संघर्ष को लद्दाख की पहचान और अधिकारों की लड़ाई बताते हैं, जबकि केंद्र सरकार उनकी सक्रियता को राजनीतिक उकसावे और विदेशी प्रभाव से जोड़ती है। एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने से साफ संदेश जाता है कि सरकार विदेशी धन के इस्तेमाल पर सख्त है और किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेगी।

आने वाली वार्ता यह तय करेगी कि क्या लद्दाख की सड़क पर उठी आवाज़ें संस्थागत बातचीत में तब्दील होंगी या टकराव और बढ़ेगा। यह सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति का मसला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास और पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा है।