बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष खालिदा जिया (Khaleda Zia) का मंगलवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पार्टी ने उनके निधन की पुष्टि की है। खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच दशकों चली राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बांग्लादेश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
BNP के अनुसार, खालिदा जिया ने सुबह करीब 6 बजे, फज्र की नमाज़ के कुछ देर बाद अंतिम सांस ली। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए देशवासियों से उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करने की अपील की।
लंबे समय से बीमारी और कानूनी संघर्षों के बावजूद खालिदा जिया अंत तक राजनीति में सक्रिय रहीं। नवंबर में उन्होंने संकेत दिया था कि वह फरवरी 2026 में प्रस्तावित आम चुनाव के लिए प्रचार में उतरेंगी। यह घोषणा ऐसे समय आई थी जब पिछले वर्ष शेख हसीना सत्ता से बाहर हुई थीं।
शुरुआती जीवन और राजनीति में प्रवेश
खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रांत के तत्कालीन दिनाजपुर जिले के जलपाईगुड़ी में हुआ था, जो अब भारत के पश्चिम बंगाल में स्थित है। वह राष्ट्रीय राजनीति में तब प्रमुखता से उभरीं जब उनके पति जियाउर रहमान 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने।
1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने सैन्य शासन के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप 1990 में तानाशाही शासन का अंत हुआ और देश में लोकतंत्र की बहाली हुई।
राजनीतिक करियर और विवाद
खालिदा जिया 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और 1996 तक इस पद पर रहीं। इसके बाद उन्होंने 2001 से 2006 तक दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
हालांकि, उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी सरकार को घेरा। इस अवधि में बांग्लादेश को वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में सबसे निचले पायदान पर रखा गया था।
सत्ता से हटने के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और एक सैन्य समर्थित कार्यवाहक सरकार का गठन हुआ। 2018 में शेख हसीना सरकार के दौरान खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भेजा गया, जिन्हें उन्होंने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
स्वास्थ्य खराब होने के कारण 2019 में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में मानवीय आधार पर नजरबंद कर दिया गया। नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतिम भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया, जिससे उनके राजनीतिक पुनरागमन की संभावनाएं मजबूत हुईं।
परिवार और विरासत
इस वर्ष की शुरुआत में खालिदा जिया इलाज के लिए ब्रिटेन गई थीं और अंतरिम सरकार की अनुमति के बाद वापस बांग्लादेश लौटी थीं।
उनके बड़े बेटे तारिक रहमान BNP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और हाल ही में 17 वर्षों के आत्मनिर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं। माना जा रहा है कि वह 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे और BNP की जीत की स्थिति में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हो सकते हैं।
खालिदा जिया के छोटे बेटे आराफात रहमान “कोको” का 2015 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी राजनीति से जुड़े रहे हैं, जिनमें उनकी बहन खुर्शीद जहां और भाई सईद इस्कंदर शामिल हैं।
एजेंसियों से प्राप्त इनपुट

