AI-Based Monsoon Forecast: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मानसून पूर्वानुमान अब सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर सीधे किसानों के फैसलों पर दिखाई देने लगा है। भारत सरकार द्वारा खरीफ 2025 के दौरान लागू किए गए एक AI-आधारित पायलट प्रोजेक्ट से जुड़े सर्वे में सामने आया है कि 31 से 52 प्रतिशत किसानों ने अपनी बुवाई रणनीति में बदलाव किया।
यह पायलट पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने डेवलपमेंट इनोवेशन लैब–इंडिया के सहयोग से देश के 13 कृषि-प्रधान राज्यों में शुरू की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूरे मौसम के सामान्य अनुमान देने के बजाय स्थानीय स्तर पर मानसून की शुरुआत की अधिक सटीक जानकारी किसानों तक पहुंचाना था, ताकि वे खेत की तैयारी और बुवाई की तारीख से जुड़े फैसले समय पर ले सकें।
AI मॉडल और डेटा की भूमिका
इस परियोजना में एक ओपन-सोर्स हाइब्रिड AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया, जिसमें गूगल का NeuralGCM, यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स का AI-फोरकास्टिंग सिस्टम और भारत मौसम विज्ञान विभाग के पिछले 125 वर्षों के वर्षा आंकड़े शामिल किए गए। यह मॉडल किसी निश्चित तिथि की भविष्यवाणी करने के बजाय स्थानीय मानसून आगमन की संभाव्यता बताता है, जिससे किसानों को जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
SMS के जरिए किसानों तक पहुंची जानकारी
AI-आधारित पूर्वानुमानों को एम-किसान पोर्टल के माध्यम से 13 राज्यों के करीब 38.8 करोड़ किसानों तक SMS के जरिए भेजा गया। संदेश हिंदी, ओड़िया, मराठी, बांग्ला और पंजाबी सहित पांच क्षेत्रीय भाषाओं में साझा किए गए, ताकि सूचना अधिक प्रभावी और उपयोगी बन सके। इस पहल की खास बात यह रही कि किसानों को किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं दी गई और पूरी योजना सूचना आधारित रही।
सर्वे से सामने आए अहम निष्कर्ष
पूर्वानुमान भेजे जाने के बाद मध्य प्रदेश और बिहार में किसान कॉल सेंटरों के माध्यम से टेलीफोनिक फीडबैक सर्वे किया गया। सर्वे में पाया गया कि बड़ी संख्या में किसानों ने खेत की तैयारी और बुवाई के समय में बदलाव किया। इसके अलावा कुछ किसानों ने फसल चयन, बीज और अन्य कृषि आदानों के इस्तेमाल से जुड़े फैसलों पर भी दोबारा विचार किया।
इस AI-आधारित पायलट योजना और इसके प्रभाव की जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से साझा की। बढ़ती जलवायु अनिश्चितताओं के दौर में यह पहल दिखाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसानों के लिए बेहतर योजना, समय प्रबंधन और जोखिम कम करने का एक मजबूत साधन बन सकता है, खासकर यदि इसे भविष्य में व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।

