नीतियाँ बदलीं, निवेश बढ़ा, पर दोगुनी आय का लक्ष्य अब भी चुनौती

Farmers’ Income
Farmers’ Income

Farmers’ Income Doubling Plan:  केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा ने कृषि नीति में एक बड़ा बदलाव संकेत किया था। इसका उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को लंबे समय तक लाभकारी और टिकाऊ बनाना था। हालांकि, वर्षों बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या किसानों की आमदनी वास्तव में दोगुनी हो पाई है या फिर लक्ष्य अभी अधूरा है।

नीति की पृष्ठभूमि और रणनीति

अप्रैल 2016 में किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने सितंबर 2018 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सात प्रमुख रास्ते सुझाए गए। इनमें फसल और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना, खेती की लागत घटाना, फसल चक्र की आवृत्ति बढ़ाना, उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख करना, बाजार से बेहतर दाम सुनिश्चित करना और कृषि से जुड़े गैर-कृषि रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना शामिल था। इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनवरी 2019 में एक सशक्त समिति भी गठित की गई।

लोकसभा में सरकार का पक्ष

किसानों की आय से जुड़े सवालों पर सरकार ने लोकसभा में अपनी स्थिति स्पष्ट की। कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित उत्तर में बताया कि कृषि एक राज्य विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों को नीतिगत मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट वर्ष 2013–14 में 21,933.50 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025–26 में 1,27,290.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि यह बढ़ा हुआ बजट किसानों की आय में वृद्धि से जुड़ी पहलों को मजबूती प्रदान करता है।

योजनाएँ और ज़मीनी हस्तक्षेप

लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्यक्ष आय सहायता, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना के जरिए जोखिम से सुरक्षा, संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत सस्ती दरों पर ऋण और कृषि अवसंरचना कोष शामिल हैं। इसके अलावा 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

सरकार ने यह भी बताया कि यंत्रीकरण, डिजिटल कृषि, ड्रोन आधारित सेवाएं, फसल विविधीकरण, बागवानी, खाद्य तेल मिशन, बांस मिशन, मधुमक्खी पालन और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास जैसी पहलों को किसानों की आमदनी बढ़ाने से जोड़ा गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नीतियों और निवेश के बावजूद, दोगुनी आय का लक्ष्य हासिल करने के लिए ज़मीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।