“उज्जैन वही जाता है, जिसे महाकाल स्वयं बुलाते हैं।” यह मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धालुओं के मन में गहराई से बसती है। हाल ही में उज्जैन की यात्रा और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिला। जैसे ही उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 15 मिनट की दूरी पर स्थित महाकाल प्रांगण में कदम रखा, ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी दिव्य लोक में प्रवेश कर लिया हो।
मंदिर प्रवेश के लिए कई द्वार हैं, लेकिन सबसे आकर्षक और भव्य त्रिवेणी द्वार है, जिसके साथ अत्यंत सुंदर महाकाल कॉरिडोर भी बना हुआ है। प्रवेश करते ही भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा मन को मोह लेती है। इसके बाद भगवान शिव के विविध रूपों की भव्य मूर्तियां श्रद्धालुओं को आस्था से भर देती हैं। मंदिर का सबसे पुराना प्रवेशद्वार गेट नंबर 1 – अवंतिका द्वार माना जाता है।
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग और उसकी मान्यता
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जिसे यमराज की दिशा कहा जाता है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन से जीवन एक बार फिर शून्य से प्रारंभ हो जाता है। भक्त अपने पूर्व कर्मों का बोझ वहीं छोड़ आते हैं और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा पाते हैं।
दर्शन के पश्चात जब प्रांगण में निकलते हैं, तो भगवान ओंकारेश्वर सहित कई अन्य मंदिरों के दर्शन भी किए जा सकते हैं।
भस्म आरती का अलौकिक अनुभव
मंदिर परिसर में लगी बड़ी-बड़ी LED स्क्रीन पर भक्तगण महाकाल की विभिन्न आरतियों का दिव्य दृश्य देख सकते हैं। हमें भी सुबह की प्रथम और प्रसिद्ध ‘भस्म आरती’ की टिकट प्राप्त हुई। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण लगभग दो महीने पहले करना पड़ता है, अन्यथा एक दिन पूर्व ऑफलाइन आवेदन करना पड़ता है।
सुबह की भस्म आरती से लेकर रात की शयन आरती तक भक्त अलग-अलग आरतियों में सम्मिलित होकर महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेते हैं। मंदिर बोर्ड द्वारा लड्डू प्रसाद भी उपलब्ध कराया जाता है—बेसन, रागी, गुड़ और देसी घी के दिव्य स्वाद वाले प्रसाद के साथ। अन्न प्रसादम के लिए भी नि:शुल्क कूपन उपलब्ध होते हैं।
महाकाल परिसर के आसपास स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल
महाकाल मंदिर के पास ही कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं—
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मां हरसिद्धि मंदिर
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बड़े गणेश जी मंदिर
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बैकुंठ धाम मंदिर
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चार धाम मंदिर
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राम घाट (शिप्रा नदी)
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भगवान चित्रगुप्त मंदिर
मां हरसिद्धि की शाम की आरती अत्यंत दिव्य अनुभव कराती है और बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करती है।
कुछ दूरी पर स्थित अन्य प्रमुख स्थल—
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ऋण मुक्तेश्वर महादेव
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भृतहरी गुफा
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गढ़कालिका शक्ति पीठ
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स्थिरमन गणेश मंदिर
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काल भैरव मंदिर
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सिद्धवट मंदिर
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मंगलनाथ मंदिर
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संदीपनी आश्रम
कहते हैं कि ऋण मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से जीवन के सभी प्रकार के ऋण समाप्त हो जाते हैं। माना जाता है कि वनवास के दौरान माता सीता के अनुरोध पर भगवान राम ने मन की शांति हेतु स्थिरमन गणेश की स्थापना की थी।
सिद्धवट में स्थित वट वृक्ष को माता पार्वती द्वारा स्वयं लगाया गया बताया जाता है। इसी वृक्ष के नीचे भगवान कार्तिकेय को ताड़कासुर वध के बाद माता पार्वती ने भोजन कराया था। यहां पूर्वजों का पिंडदान भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
उज्जैन—जीवंत इतिहास की भूमि
समग्र रूप से, उज्जैन केवल महाकाल की नगरी ही नहीं, बल्कि हिंदू सभ्यता के स्वर्णिम इतिहास का साक्षात जीवित स्वरूप है। यह शहर आज भी वैसा ही भव्य, पवित्र और शक्तिशाली दिखाई देता है जैसा सदियों पहले था।
— मंगत राम महाजन, कठुआ

