Shadi Muhurat 2026: 14 अप्रैल 2026 से एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी है। खरमास की समाप्ति के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ दौर शुरू हो गया है। पिछले एक महीने से चल रहे इस अशुभ काल के दौरान सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर रोक लगी हुई थी, लेकिन अब सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही यह बाधा समाप्त हो गई है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य मीन राशि में होते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा और अन्य शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। 15 मार्च से शुरू हुआ यह खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हुआ, जिससे अब सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय उपलब्ध हो गया है।
खासतौर पर 19 अप्रैल 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन अक्षय तृतीया का पर्व है। इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, यानी इस दिन बिना पंचांग देखे भी विवाह और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं। यही कारण है कि इस दिन बड़ी संख्या में शादियां होने की संभावना है।
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, 19 अप्रैल से लेकर 29 जून तक विवाह के लिए कुल 24 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। अप्रैल के अंत से लेकर मई और जून के शुरुआती दिनों तक शादी समारोहों की भरमार देखने को मिलेगी। मई का महीना विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान गुरु और शुक्र की स्थिति विवाह के लिए शुभ फल देने वाली रहेगी, जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय और स्थिर रहने की मान्यता है।
हालांकि, इस बीच 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसे मलमास भी कहा जाता है। इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर फिर से रोक लग जाएगी। ऐसे में अक्षय तृतीया से पहले और इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाने की संभावना है।
इसके बाद जुलाई में देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी, जो 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। चातुर्मास के दौरान भी विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते। यही कारण है कि अप्रैल से जुलाई के बीच का समय विवाह के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
खरमास समाप्त होने के बाद अब 16 संस्कारों से जुड़े सभी कार्य जैसे नामकरण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ आदि भी शुभ मुहूर्त में किए जा सकते हैं। इसके अलावा गृह प्रवेश और नए घर के निर्माण कार्य भी इस अवधि में शुरू किए जा सकते हैं।
सनातन धर्म में विवाह को जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। यह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। धार्मिक दृष्टि से यह 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है, जिसके बिना व्यक्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश नहीं कर सकता।
कुल मिलाकर, 14 अप्रैल से शुरू हुआ यह विवाह सीजन लोगों के लिए खुशियों और उत्सव का समय लेकर आया है। खासकर 19 अप्रैल का अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त उन लोगों के लिए सुनहरा अवसर है, जो लंबे समय से अपने विवाह का इंतजार कर रहे थे। आने वाले महीनों में देशभर में शादी समारोहों की रौनक देखने को मिलेगी।

