Magh Mela 2026: मौनी अमावस्या पर किन्नर अखाड़े का संगम में भव्य स्नान

Magh Mela 2026
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Magh Mela 2026: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर किन्नर अखाड़े ने भव्य और आध्यात्मिक अंदाज में संगम तट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। महाकुंभ के बाद यह पहला अवसर था जब किन्नर अखाड़े के संत-साधु बड़ी संख्या में एकत्र होकर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान के लिए पहुंचे। इस धार्मिक आयोजन का नेतृत्व किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किया।

किन्नर अखाड़े की शानदार एंट्री

मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर किन्नर संतों का प्रवेश श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। सैकड़ों की संख्या में किन्नर साधु-संत भगवा वस्त्र धारण कर, हाथों में त्रिशूल और डमरू लिए “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ संगम तट पर पहुंचे। पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को बड़े ही श्रद्धा भाव से देखा और किन्नर संतों का स्वागत किया।

शंखनाद के साथ धार्मिक अनुष्ठान

इस पावन अवसर पर गोरखपुर की महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि ने शंखनाद कर स्नान पर्व की शुरुआत की। शंखध्वनि के साथ किन्नर अखाड़े के संतों ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
इस दौरान किन्नर अखाड़े के संरक्षक दुर्गादास महाराज, उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंद गिरि, झारखंड की प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरि, पंजाब की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी वामदेव, उड़ीसा की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी मीरा नंद गिरि, गुजरात की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी गिरनारी नंद गिरि सहित बड़ी संख्या में किन्नर संत, शिष्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सनातन धर्म की बढ़ती आस्था

किन्नर अखाड़े की प्रमुख डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि माघ मास में तीर्थराज प्रयागराज में गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भीषण ठंड, घना कोहरा और तेज हवाओं के बावजूद जिस तरह देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं, वह सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रमाण है।

उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में सनातन धर्म लगातार समृद्ध और विकसित हो रहा है। इसमें युवा पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी बेहद उत्साहजनक है। धार्मिक आयोजनों में युवाओं की रुचि इस बात का संकेत है कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत हो रही हैं और आने वाली पीढ़ियां इन्हें और आगे बढ़ाएंगी।

श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। किन्नर अखाड़े की मौजूदगी ने इस धार्मिक आयोजन को और भी खास बना दिया। श्रद्धालुओं ने किन्नर संतों के साथ स्नान कर आशीर्वाद लिया और इस आध्यात्मिक अनुभव को अपने जीवन का यादगार पल बताया।

माघ मेला हमेशा से आस्था, भक्ति और संस्कृति का प्रतीक रहा है। किन्नर अखाड़े की यह भव्य भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। मौनी अमावस्या के इस पावन अवसर पर संगम तट पर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।