उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बार फिर अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ा बयान देते हुए कहा है कि न तो ‘कयामत’ का दिन कभी आने वाला है और न ही बाबरी ढांचे का दोबारा निर्माण कभी संभव होगा। मंगलवार को बाराबंकी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अब एक ऐतिहासिक सच्चाई है, जिसे कोई भी शक्ति बदल नहीं सकती।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “हमने वर्षों पहले कहा था—‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।’ आज मंदिर बन चुका है। इसमें किसी को कोई संदेह है क्या?” उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग आज भी बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण का सपना देख रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि ‘कयामत’ का दिन कभी नहीं आएगा और इसलिए ऐसे सपने भी कभी पूरे नहीं होंगे।
मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लंबे संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि इन पांच सदियों के दौरान अनेक शासक आए, कई राजवंश बदले, देश आज़ाद हुआ, लोकतंत्र स्थापित हुआ और सरकारें भी बदलीं, लेकिन किसी ने भी भगवान राम को उनकी जन्मभूमि पर मंदिर दिलाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।
योगी आदित्यनाथ ने सवाल उठाया कि 1947 में आज़ादी के बाद और 1952 में पहले आम चुनाव के बाद जब लगातार सरकारें बनीं, तब आखिर क्यों किसी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह कार्य वर्तमान सरकार के संकल्प, आस्था और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस फैसले के तहत अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ भूमि देने का आदेश दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कर इस ऐतिहासिक अध्याय को पूर्णता दी।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या के धन्नीपुर गांव में दी गई पांच एकड़ जमीन पर अब तक कोई निर्माण नहीं हो सका है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने न्यायालय के आदेश का पूरी तरह सम्मान किया है।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल अवसरवादी रवैया अपनाते हैं। “जब संकट आता है तो उन्हें राम याद आते हैं, और संकट टलते ही वे राम को भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को अब भगवान राम भी भूल चुके हैं,” योगी ने कहा। उन्होंने आगे जोड़ा कि रामद्रोहियों के लिए अब राजनीति में कोई स्थान नहीं बचा है।
मुख्यमंत्री ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो अतीत में राम भक्तों पर गोलियां चलाने या राम मंदिर निर्माण में बाधा डालने के आरोपी रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग आज भी बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण के सपने देख रहे हैं, लेकिन उन्हें यह सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए कि अब इतिहास ने करवट ले ली है और यह बदलाव स्थायी है।
योगी आदित्यनाथ के इस बयान को आगामी राजनीतिक माहौल और राम मंदिर के बाद बदले सामाजिक परिदृश्य के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। उनका यह संदेश साफ है कि अयोध्या और राम मंदिर का मुद्दा अब समाप्त अध्याय है और इसे लेकर किसी भी तरह की पुनर्व्याख्या या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है।

