Women Reservation Bill: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित न किए जाने के विरोध में शनिवार को एक सम्मेलन में काली पट्टी बांधकर हिस्सा लिया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुखद बताया और विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
यह सम्मेलन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स द्वारा आयोजित महिला उद्यमी शिखर सम्मेलन था, जहां मुख्यमंत्री ने न केवल अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि महिलाओं के समर्थन में नारे भी लगाए। उन्होंने कहा कि देश की हर महिला अब अपने-अपने क्षेत्र में विपक्ष के इस रवैये के खिलाफ आवाज उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि विपक्ष ने यह तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर महिलाओं को लोकसभा तक पहुंचने से रोका जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल अपने परिवार की महिलाओं के बारे में सोचते हैं, जबकि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करते हैं।
रेखा गुप्ता ने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि देश की आधी आबादी संसद में प्रतिनिधित्व पाए। उन्होंने कहा कि हर महिला अब इस मुद्दे पर सवाल उठाएगी और जवाब भी मांगेगी। मुख्यमंत्री ने जनसंख्या और संसद की सीटों के संदर्भ में भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 1971 में देश की आबादी करीब 50 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 140 करोड़ हो गई है। ऐसे में सीटों की संख्या भी बढ़नी चाहिए थी, लेकिन विपक्ष अपने राजनीतिक हितों के चलते इसका विरोध करता रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत की तुलना अन्य बड़े देशों से की जाती है, तो वहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 50 प्रतिशत तक है, जबकि भारत में अभी भी यह काफी कम है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा और अधिकारों का सवाल है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष, खासकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला सशक्तीकरण के रास्ते में बाधा डाली हो। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं और इस तरह के अन्याय का जवाब जरूर देंगी।
अंत में, रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने अधिकारों के लिए और मजबूती से खड़ी होंगी और देश की राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगी।

