जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने शनिवार को आशा जताई कि बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की राजनीतिक स्थिरता न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है, बल्कि भारत के हितों के लिए भी लाभदायक है।
श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) में आयोजित वार्षिक एग्रीटेक महोत्सव ‘गोंगुल’ के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध चाहता है।
अब्दुल्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारे पड़ोसी देश जितने अधिक स्थिर और समृद्ध होंगे, उतना ही हमें फायदा होगा। कोई भी देश यह नहीं चाहता कि उसके आसपास युद्ध या अस्थिरता का माहौल हो। चाहे वह बांग्लादेश हो, श्रीलंका, नेपाल या कोई अन्य देश—सभी में शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की प्राथमिकता यह है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत रहे और वहां की सरकार स्थिर तथा विकासोन्मुखी हो। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच हाल के समय में आई कड़वाहट दूर होगी और आपसी विश्वास फिर से मजबूत होगा।
क्षेत्रीय स्थिरता से भारत को लाभ
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि दक्षिण एशिया में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता से भारत को व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टि से सीधा लाभ मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में क्षेत्रीय सहयोग और संवाद पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। ऐसे समय में भारत को अपने पड़ोसियों के साथ रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
कृषि और तकनीकी नवाचार पर जोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय किसानों तक तकनीक आधारित जैविक समाधान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
उन्होंने कहा, “लाखों लोग इस एग्रीटेक महोत्सव में भाग ले रहे हैं और नई तकनीकों के बारे में सीख रहे हैं। यदि भविष्य में हमें अमेरिका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करनी है और उनके कृषि उत्पाद हमारे बाजार में आते हैं, तो हमें अपनी उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों बढ़ानी होंगी।”
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और तकनीक का समावेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाने की अपील की, ताकि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा की जा सके।
उमर अब्दुल्ला का बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में राजनीतिक बदलावों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति पड़ोसी देशों के साथ स्थिर, शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने की है। बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद जताते हुए उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता को भारत के विकास से जोड़ा।

