मध्य प्रदेश खांसी सिरप कांड में नई मुसीबत: डॉ. प्रवीन सोनी के परिवार की मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द, जांच ने खोली नई परतें

मध्य प्रदेश के एक क्लिनिक में बैठे डॉक्टर, खांसी सिरप कांड से जुड़ी जांच के दौरान पूछताछ होती हुई।
छिंदवाड़ा जिले के एक क्लिनिक में बैठे डॉक्टर की तस्वीर, जिन्हें दूषित खांसी सिरप प्रकरण में जांच के दायरे में लिया गया है।

छिंदवाड़ा के परासिया इलाके में 14 बच्चों की मौत से जुड़े खांसी सिरप कांड ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। सरकार ने आरोपी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीन सोनी के परिवार से जुड़ी मेडिकल स्टोर का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। साथ ही, प्रदेश सरकार ने जांच के दायरे को और विस्तृत करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

परिवार की मेडिकल स्टोर पर गिरी गाज

छिंदवाड़ा जिले के परासिया स्थित अपना मेडिकल स्टोर्स की जांच के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। दवा नियंत्रण विभाग (FDA) के अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण में बिक्री रजिस्टर अधूरे पाए गए, दवाएं बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के बेची जा रही थीं, और बिक्री बिल भी उपलब्ध नहीं थे। लाइसेंसिंग प्राधिकरण शरद कुमार जैन ने बताया कि स्टोर को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था, लेकिन समय पर जवाब न देने पर लाइसेंस रद्द कर दिया गया। जांच से यह भी सामने आया है कि यह मेडिकल स्टोर डॉ. सोनी के परिवार से जुड़ा हुआ है और उनके क्लिनिक के बिल्कुल पास स्थित है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर और डॉक्टर के परिवार के बीच कोई कारोबारी रिश्ता था।

कहाँ से आया जहरीला सिरप? सरकार की बड़ी जांच शुरू

राज्य सरकार ने अब इस पूरे प्रकरण की जड़ तक जाने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जबलपुर से 600 से अधिक बोतलें जहरीले खांसी सिरप की छिंदवाड़ा भेजी गईं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा परासिया पहुंचा। अब तक लगभग 400 बोतलें जब्त की जा चुकी हैं, जबकि 200 बोतलों का कोई सुराग नहीं है। आशंका है कि वे पहले ही बाजार में बिक चुकी होंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि दूषित सिरप छिंदवाड़ा कैसे पहुंचा और वितरण प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था। सभी बिंदुओं की क्रॉस-वेरिफिकेशन की जा रही है।”

अधिकारियों पर भी गिरी गाज, निलंबन और तबादले की झड़ी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।
उन्होंने छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और जबलपुर के शरद कुमार जैन को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के डिप्टी डायरेक्टर शोभित कोष्टा को भी सस्पेंड किया गया, जबकि ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य का तबादला कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ एक डॉक्टर या कंपनी की गलती नहीं है, बल्कि निगरानी तंत्र की नाकामी भी है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

सरकार की कार्रवाई: घर-घर से सिरप जब्त करने का आदेश

मुख्यमंत्री यादव ने निर्देश दिया है कि सिर्फ बिक्री पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि घरों में जाकर भी दूषित सिरप की रिकवरी की जाए। इस अभियान में आशा और उषा कार्यकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन को लगाया गया है।

सरकार ने निजी अस्पतालों, चिकित्सकों और दवा विक्रेताओं के साथ बैठकें कर सावधानी के दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संदिग्ध दवाएं पीने वाले बच्चों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे चल रहा है। जिनकी हालत बिगड़ी हुई पाई गई, उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज, नागपुर रेफर किया गया है।

बाल रोग विशेषज्ञों और संगठनों का सहयोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवेदनशील प्रकरण में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) और विभिन्न केमिस्ट संघों का सहयोग लिया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सप्लाई चेन में गंभीर चूक का उदाहरण है। एक फार्मास्युटिकल विश्लेषक ने बताया, “यदि दवा की गुणवत्ता जांच में ढिलाई बरती गई, तो यह केवल एक जिला नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए खतरा बन सकता है।”

भविष्य के लिए सख्त दिशा-निर्देश

राज्य सरकार ने सभी दवा दुकानों और वितरण एजेंसियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति में ही की जा सकेगी। इसके साथ ही, दवाओं पर चेतावनी और सावधानी सूचनाएं स्पष्ट रूप से लिखी हों, यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है।

छिंदवाड़ा खांसी सिरप कांड ने मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सरकार ने भी तेजी से एक्शन लेकर सख्त संदेश दिया है कि दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाएगा।