LPG Price Hike: अखिलेश का BJP पर तंज, 7 रुपये क्यों?

LPG Price Hike
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LPG Price Hike: वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमतों में हालिया तेज बढ़ोतरी को लेकर सियासत गर्म हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस फैसले से आम लोगों पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार को कीमत बढ़ानी ही थी, तो सीधे 1000 रुपये बढ़ा देती, “7 रुपये कम करके एहसान क्यों दिखाया जा रहा है?”

शुक्रवार को वाणिज्यिक LPG cylinder की कीमत में 993 रुपये प्रति 19 किलोग्राम सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई। यह हाल के समय की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। इसके साथ ही यह लगातार तीसरा महीना है जब वाणिज्यिक गैस के दामों में इजाफा हुआ है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

नई कीमतों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलो का वाणिज्यिक सिलेंडर अब 3,071.50 रुपये में मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत 2,078.50 रुपये थी। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि वाणिज्यिक गैस की कीमत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “सिलेंडर महंगा नहीं होता, रोटी-थाली महंगी होती है।” उनका कहना था कि महंगाई का असली असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है, खासकर उन लोगों पर जो खुद मेहनत करके अपना खर्च उठाते हैं।

उन्होंने आगे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर इतनी बड़ी बढ़ोतरी करनी थी, तो 1000 रुपये का सीधा इजाफा कर देते। “1000 में 7 रुपये कम करके सरकार किस पर एहसान कर रही है?”—इस सवाल के जरिए उन्होंने सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए।

इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारण भी बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में विफल रही है और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

अखिलेश यादव ने महंगाई के साथ-साथ बेरोजगारी और आर्थिक मंदी जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए कब कोई ठोस कदम उठाएगी और कब इन पर जवाबदेही तय की जाएगी।

इस बीच, उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। हाल ही में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में एक विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर उठी बहस ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वाणिज्यिक गैस की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का असर केवल व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाता है।