Loan Guarantor Rules: दोस्ती, रिश्तेदारी या भरोसे के चलते लोग अक्सर बिना ज्यादा सोचे-समझे किसी के लोन के गारंटर (Loan Guarantor) बनने के लिए तैयार हो जाते हैं। कई बार यह सिर्फ एक औपचारिक सिग्नेचर जैसा लगता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा गंभीर होती है। कानूनी तौर पर गारंटर बनना सिर्फ मदद करना नहीं, बल्कि कर्ज की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना होता है। अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर भुगतान नहीं करता या डिफॉल्ट कर जाता है, तो बैंक सीधे गारंटर से पैसे वसूल सकता है। ऐसे में आपकी बचत, संपत्ति और क्रेडिट स्कोर सभी खतरे में पड़ सकते हैं।
कानून में गारंटर की जिम्मेदारी बेहद सख्त
भारतीय कानून में गारंटर की भूमिका को बहुत गंभीरता से देखा जाता है। Indian Contract Act, 1872 में इससे जुड़ी कई धाराएं मौजूद हैं, जो गारंटर की जिम्मेदारी और अधिकारों को स्पष्ट करती हैं।
धारा 126 (Section 126) के अनुसार, गारंटी एक ऐसा अनुबंध है जिसमें यदि मुख्य कर्जदार यानी Principal Debtor कर्ज चुकाने में असफल रहता है, तो गारंटर यानी Surety उसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य होता है।
वहीं धारा 128 (Section 128) गारंटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस धारा के अनुसार गारंटर की जिम्मेदारी “Co-extensive” होती है। इसका मतलब यह है कि जितनी जिम्मेदारी लोन लेने वाले की है, उतनी ही गारंटर की भी होती है। बैंक चाहे तो सीधे गारंटर से पूरी बकाया राशि वसूल सकता है, भले ही मुख्य कर्जदार से वसूली की प्रक्रिया पूरी न हुई हो।
अगर कर्जदार लोन नहीं चुकाए तो गारंटर पर क्या असर पड़ सकता है
1. आर्थिक बोझ बढ़ सकता है
अगर मुख्य कर्जदार EMI देना बंद कर देता है, तो बैंक सबसे पहले गारंटर को नोटिस भेज सकता है। इसके बाद बैंक गारंटर से पूरी बकाया राशि, ब्याज और पेनल्टी की मांग कर सकता है। अगर गारंटर भुगतान नहीं करता, तो बैंक कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है।
2. क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है
कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि लोन डिफॉल्ट होने का असर गारंटर के CIBIL स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि भविष्य में जब आप खुद लोन लेने जाएंगे, तो बैंक आपको जोखिम भरा ग्राहक मान सकता है और आपका आवेदन खारिज भी कर सकता है।
3. कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है
यदि बैंक को भुगतान नहीं मिलता, तो वह गारंटर के खिलाफ अदालत में केस भी दर्ज कर सकता है। गारंटर के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के कारण वह कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है और यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि कर्ज किसी और ने लिया था।
4. संपत्ति भी खतरे में पड़ सकती है
कर्ज की वसूली के लिए बैंक गारंटर की चल-अचल संपत्ति पर भी दावा कर सकता है। कुछ मामलों में बैंक वेतन से कटौती या संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है।
गारंटर के पास कुछ अधिकार भी होते हैं
हालांकि कानून गारंटर को कुछ सुरक्षा भी देता है।
धारा 140 (Right of Subrogation) के अनुसार, अगर गारंटर बैंक का पूरा पैसा चुका देता है, तो उसे बैंक की तरह कर्जदार से पैसा वसूलने का अधिकार मिल जाता है।
इसके अलावा धारा 141 यह कहती है कि अगर बैंक कर्जदार की किसी सिक्योरिटी को गारंटर की अनुमति के बिना छोड़ देता है, तो गारंटर की जिम्मेदारी कम हो सकती है।
गारंटर बनने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
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भावनाओं में आकर तुरंत गारंटर बनने का फैसला न लें।
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जिस व्यक्ति के लिए गारंटर बन रहे हैं, उसकी आय और भुगतान क्षमता को जरूर समझें।
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कोशिश करें कि पूरे लोन के बजाय सिर्फ एक हिस्से के लिए ही गारंटी दें।
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कर्ज लेने वाले से टर्म इंश्योरेंस लेने के लिए कहें, ताकि किसी अप्रत्याशित स्थिति में कर्ज का बोझ गारंटर पर न आए।
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सभी दस्तावेज और शर्तें ध्यान से पढ़ने के बाद ही हस्ताक्षर करें।
निष्कर्ष
किसी के लिए लोन का गारंटर बनना एक बड़ी वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारी है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि जोखिम से भरा फैसला हो सकता है। इसलिए गारंटर बनने से पहले पूरी जानकारी लेना और सभी संभावित परिणामों को समझना बेहद जरूरी है। थोड़ी सावधानी आपको भविष्य में बड़े आर्थिक संकट से बचा सकती है।

