Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महिला चिकित्सक से कथित यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। यह मामला किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में मुख्य आरोपी समेत चार लोगों के खिलाफ लगभग 250 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की गई है।
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नाइक उर्फ रमीज मलिक के अलावा उसके पिता सलीमुद्दीन, मां खदीजा और निकाह के गवाह शारिक खान को भी आरोपपत्र में नामजद किया गया है। चारों पर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गंभीर धाराओं में दर्ज है केस
पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दुष्कर्म, आपराधिक धमकी और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत भी कार्रवाई की गई है। इन धाराओं में किसी व्यक्ति को दबाव, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध माना गया है।
मुख्य आरोपी के माता-पिता और अन्य सह-अभियुक्तों पर अपराध में सहयोग, उकसाने और आरोपी को संरक्षण देने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट तैयार की गई है, जिसमें घटनाक्रम का विस्तृत विवरण शामिल है।
महिला डॉक्टर ने लगाए गंभीर आरोप
यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में दर्ज हुआ था, जब केजीएमयू की एक महिला जूनियर डॉक्टर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी डॉक्टर ने अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाकर उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उस पर गर्भपात कराने और धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डाला गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और डिजिटल सबूत भी एकत्र किए गए।
डिजिटल साक्ष्य बने अहम आधार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपपत्र में मोबाइल फोन और लैपटॉप से बरामद डेटा की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट भी शामिल की गई है। चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को केस का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को पुष्ट करने की कोशिश की गई है।
मौलवी की भूमिका की जांच जारी
मामले में पीलीभीत के मौलवी सैयद जाहिद हसन का नाम भी सामने आया था, जिन पर कथित तौर पर निकाह कराने का आरोप है। हालांकि पुलिस ने अभी उन्हें आरोपपत्र में नामजद नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी भूमिका की जांच जारी है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
आरोपी पहले ही हो चुका है गिरफ्तार
मुख्य आरोपी डॉक्टर को 9 जनवरी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी के माता-पिता को भी पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला मेडिकल संस्थानों में पेशेवर आचरण और व्यक्तिगत संबंधों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

