Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि कई सक्रिय वेदर सिस्टम के कारण अगले कुछ दिनों में भारी बारिश और ठंड में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। स्ट्रेट ऑफ मलक्का और दक्षिण अंडमान सागर में बना लो-प्रेशर एरिया पश्चिम-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और 24 नवंबर तक दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन का रूप ले सकता है। अगले 48 घंटों में इसके और अधिक मजबूत होकर साइक्लोनिक सिस्टम बनने की संभावना है। वहीं, उत्तर भारत में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठंड बढ़ेगी। समुद्री खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
अंडमान-निकोबार व दक्षिण राज्यों में भारी बारिश का खतरा
IMD के अनुसार, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर 23 से 28 नवंबर तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है।
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तमिलनाडु, केरल और माहे में 23–24 नवंबर को जोरदार बारिश की आशंका है।
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रायलसीमा में भी 23 नवंबर को भारी बारिश का अनुमान है।
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तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और लक्षद्वीप में 23 और 24 नवंबर के लिए अलर्ट जारी किया गया है।
इसके साथ ही, अंडमान-निकोबार में अगले छह दिनों तक 40–50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। तमिलनाडु के तटीय जिलों में हवा की गति 30–40 किमी/घंटा तक रहने की संभावना है।
उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड, कोहरा भी छाएगा
उत्तर-पश्चिम भारत में अगले चार दिनों के दौरान रात के तापमान में 2–3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी जा सकती है।
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महाराष्ट्र में भी तापमान के नीचे आने की संभावना है।
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पश्चिम यूपी में 23–24 नवंबर को सुबह और रात में घना कोहरा छा सकता है।
मछुआरों को सख्त चेतावनी
समुद्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए IMD ने मछुआरों को 23 से 28 नवंबर तक कई क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
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अरब सागर में केरल तट, लक्षद्वीप और कोमोरिन क्षेत्र में 23–25 नवंबर तक खतरा बना रहेगा।
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बंगाल की खाड़ी में तमिलनाडु, श्रीलंका तट, गल्फ ऑफ मन्नार और अंडमान सागर में 23–28 नवंबर तक समुद्री गतिविधियां बेहद जोखिमपूर्ण होंगी।
कई साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव
कोमोरिन क्षेत्र में मध्य-ट्रोपोस्फेरिक स्तर तक फैला एक अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके प्रभाव से 25 नवंबर के आसपास कोमोरिन, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के पास एक नया लो-प्रेशर बनने की भी संभावना है।
साथ ही दक्षिण-पूर्व अरब सागर, पूर्वी बांग्लादेश और पूर्वोत्तर अरुणाचल प्रदेश के ऊपर भी अलग-अलग स्तरों पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं, जो मौसम को और प्रभावित करेंगे।

