Cigarette Price Hike: सिगरेट पीने वालों के लिए जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। आगामी 1 फरवरी से सरकार द्वारा संशोधित उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ टैक्स) व्यवस्था लागू हो जाएगी, जिसके बाद कई प्रकार की सिगरेट और तंबाकू उत्पाद noticeably महंगे हो जाएंगे। इस नई कर व्यवस्था का ढांचा इस बार सिगरेट की लंबाई पर आधारित है, इसलिए अलग-अलग ब्रांड और श्रेणियों पर इसका असर अलग दिखाई देगा।
पहले जहां तंबाकू उत्पादों पर अपेक्षाकृत समान टैक्स लागू होता था, अब इसे कई स्तरों में विभाजित किया गया है। फिल्टर और नॉन-फिल्टर सिगरेट के साथ-साथ हर लंबाई के लिए अलग कर स्लैब तय किया गया है। सरकार का उद्देश्य एक ओर लम्बी और आमतौर पर अधिक मजबूत सिगरेटों के उपभोग को हतोत्साहित करना है, वहीं दूसरी ओर राजस्व आधार को भी व्यापक बनाना है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद खुदरा कीमतों में 20–30% तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
सबसे छोटी श्रेणी—यानी 65 मिमी तक की सिगरेट—पर अब लगभग ₹2,700 से ₹3,000 प्रति 1,000 स्टिक का उत्पाद शुल्क लगाया गया है। यह सबसे निचला टैक्स स्लैब माना जा रहा है और आमतौर पर बजट सेगमेंट की सिगरेटों पर लागू होगा।
65 मिमी से अधिक और 70 मिमी तक की सिगरेटों पर टैक्स इससे अधिक होगा, जबकि 70 मिमी से 75 मिमी की श्रेणी में कर का बोझ और ज्यादा बढ़ जाता है। इस श्रेणी के लिए टैक्स लगभग ₹7,000 प्रति 1,000 स्टिक तक पहुंच जाता है, जिससे उत्पादन और वितरण लागत में उल्लेखनीय इजाफा होना तय है।
सबसे ऊँचा कर “अन्य” श्रेणी—यानी प्रीमियम या नॉन-स्टैंडर्ड सिगरेट—पर लगाया गया है, जहां एक्साइज़ ड्यूटी ₹11,000 प्रति 1,000 स्टिक तय की गई है। इसलिए इस वर्ग के उत्पादों में कीमत का उछाल सबसे अधिक देखने को मिल सकता है।
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
अभी तक प्रमुख कंपनियों ने आधिकारिक रूप से नई कीमतें जारी नहीं की हैं, लेकिन नए कर ढांचे के अनुसार एक सिगरेट पर ₹2.7 से लेकर लगभग ₹11 तक अतिरिक्त कर जुड़ सकता है।
उदाहरण के लिए, ₹2,700 का कर 1,000 सिगरेट पर लगभग ₹2.7 प्रति स्टिक बनता है, जबकि ₹7,000 का टैक्स लगभग ₹7 प्रति स्टिक और सबसे ऊँचा स्लैब करीब ₹11 प्रति सिगरेट के बराबर बैठता है।
हालांकि खुदरा कीमतें अनिवार्य रूप से इन्हीं अनुपातों में नहीं बढ़ेंगी। कई कंपनियाँ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कुछ लागत स्वयं वहन कर सकती हैं, या फिर उपभोक्ताओं पर प्रभाव कम करने के लिए कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी कर सकती हैं। फिर भी, लंबी और प्रीमियम सिगरेटों में वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है।
कुल मिलाकर, यह कदम सरकार की दोहरी रणनीति के अनुरूप है—तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करना और कर राजस्व बढ़ाना। आने वाले हफ्तों में बाजार के समायोजन के साथ उपभोक्ताओं को कीमतों में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल सकता है।
(अस्वीकरण: धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।)

