ChatGPT, Google Gemini और Grok जैसे AI चैटबॉट्स आज तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। सवाल पूछना हो, ईमेल लिखना हो, हेल्थ से जुड़ी जानकारी चाहिए या किसी निजी परेशानी पर सलाह—लोग बिना झिझक इन AI टूल्स पर भरोसा कर रहे हैं। लेकिन टेक और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि यह बढ़ता भरोसा कई मामलों में यूजर्स के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
खास तौर पर जब बात हेल्थ, फाइनेंस और निजी पहचान से जुड़ी जानकारियों की हो, तो AI चैटबॉट्स के साथ की गई एक छोटी-सी लापरवाही भी भविष्य में बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI को सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना ठीक है, लेकिन उसे डॉक्टर, काउंसलर या फाइनेंशियल एडवाइजर का विकल्प मानना खतरनाक हो सकता है।
OpenAI की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
OpenAI की एक हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हर हफ्ते करीब 23 करोड़ से ज्यादा यूजर्स ChatGPT से हेल्थ और वेलनेस से जुड़े सवाल पूछते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे यूजर्स की है, जो अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, पुरानी बीमारियों का रिकॉर्ड, चल रही दवाइयों की जानकारी और यहां तक कि मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट्स तक AI चैटबॉट्स के साथ साझा कर रहे हैं।
यह जानकारी बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि हेल्थ डेटा किसी भी व्यक्ति की सबसे निजी पहचान से जुड़ा होता है। एक बार अगर यह डेटा गलत जगह पहुंच गया, तो इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।
हेल्थ सलाह देने वाले AI प्लेटफॉर्म
हाल के महीनों में कई AI कंपनियों ने हेल्थ सेक्टर में कदम बढ़ाया है। OpenAI ने ‘ChatGPT Health’ नाम का फीचर लॉन्च किया है, जहां यूजर्स अपने स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यूजर्स द्वारा दी गई मेडिकल जानकारी को गोपनीय रखा जाता है और इसका इस्तेमाल AI ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाता।
इसी तरह Anthropic कंपनी ने ‘Claude’ नाम का AI टूल पेश किया है, जो हेल्थ और वेलनेस से जुड़ी जानकारी देता है। इन प्लेटफॉर्म्स का मकसद लोगों को शुरुआती जानकारी देना बताया जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां सावधानी बेहद जरूरी है।
एक्सपर्ट्स क्यों कर रहे हैं चेतावनी
The Verge की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई हेल्थ डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स AI कंपनियों के दावों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उनका कहना है कि भले ही अभी कंपनियां डेटा सुरक्षित रखने की बात कर रही हों, लेकिन भविष्य में पॉलिसी बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अगर कभी डेटा पॉलिसी में बदलाव हुआ या किसी कारण से डेटा लीक हुआ, तो यूजर्स की मेडिकल हिस्ट्री, हेल्थ कंडीशन और निजी जानकारियां AI मॉडल ट्रेनिंग, विज्ञापन या अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।
गलत इस्तेमाल से हो सकता है बड़ा नुकसान
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हेल्थ से जुड़ा संवेदनशील डेटा अगर गलत हाथों में चला जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने, नौकरी में भेदभाव, फाइनेंशियल फ्रॉड और गंभीर प्राइवेसी उल्लंघन जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
इतना ही नहीं, AI द्वारा दी गई अधूरी या गलत हेल्थ सलाह को अगर कोई व्यक्ति बिना डॉक्टर से सलाह लिए मान ले, तो यह सेहत के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।
यूजर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
विशेषज्ञों की सलाह है कि AI चैटबॉट्स से बातचीत करते समय अपनी पहचान से जुड़ी जानकारी साझा न करें। इनमें आपका पूरा नाम, मोबाइल नंबर, आधार या अन्य आईडी डिटेल्स, मेडिकल रिपोर्ट्स, टेस्ट रिजल्ट्स और बीमारी का पूरा इतिहास शामिल है।
AI को केवल एक जनरल गाइड या जानकारी के स्रोत की तरह इस्तेमाल करें। किसी भी गंभीर हेल्थ समस्या, मानसिक तनाव या मेडिकल फैसले के लिए डॉक्टर या प्रोफेशनल की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
AI चैटबॉट्स तकनीक का बेहतरीन उदाहरण हैं, लेकिन अंधा भरोसा नुकसानदेह हो सकता है। थोड़ी सतर्कता और समझदारी आपको बड़े जोखिम से बचा सकती है।

