Bihar Sainik School पटना | देश में युवाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए तैयार करने वाले सैनिक स्कूलों की श्रृंखला में बिहार का भी अहम योगदान है। राज्य में इस समय दो प्रमुख सैनिक स्कूल कार्यरत हैं — सैनिक स्कूल नालंदा और सैनिक स्कूल गोपालगंज। दोनों संस्थान रक्षा मंत्रालय के अधीन Sainik Schools Society द्वारा संचालित हैं और हर वर्ष हजारों अभ्यर्थी यहां प्रवेश पाने का सपना देखते हैं।
बिहार में सैनिक स्कूलों में प्रवेश राष्ट्रीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) के माध्यम से होता है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) आयोजित करती है। यह परीक्षा हर वर्ष जनवरी महीने में ली जाती है और इसके परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कक्षा 6 और कक्षा 9 में किया जाता है।
सैनिक स्कूल नालंदा: बिहार का गौरवशाली संस्थान
2003 में स्थापित सैनिक स्कूल नालंदा बिहार के नालंदा जिले में स्थित है। यह राज्य का पहला सैनिक स्कूल था जिसने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक और अनुशासनात्मक उत्कृष्टता के लिए पहचान बनाई।
2025-26 सत्र के लिए यहाँ कक्षा 6 में लगभग 85 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से करीब 62 सीटें लड़कों के लिए और 10 से 12 सीटें लड़कियों के लिए आरक्षित हैं।
इसके अतिरिक्त कक्षा 9 में लगभग 31 सीटें निर्धारित की गई हैं। Bihar Sainik School
यहाँ छात्रों का चयन पूरी तरह मेरिट और आरक्षण के आधार पर होता है। नालंदा स्कूल में होम-स्टेट (बिहार) के छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि कुछ सीटें अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए भी खुली रहती हैं।
सैनिक स्कूल गोपालगंज: सीमित सीटें, बड़ी प्रतिस्पर्धा
दूसरा प्रमुख संस्थान सैनिक स्कूल गोपालगंज है, जो बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित है। यहाँ कक्षा 6 में लगभग 80 सीटें उपलब्ध हैं।
यहां भी लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए प्रवेश की सुविधा है। हालांकि, आवेदनकर्ताओं की संख्या सीटों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है, जिससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाती है।
गोपालगंज सैनिक स्कूल अपने अनुशासित वातावरण, खेलकूद और सैन्य प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। यह संस्थान हर साल कई छात्रों को NDA और अन्य रक्षा सेवाओं के लिए तैयार करता है।
कुल सीटें और प्रवेश प्रक्रिया
दोनों स्कूलों को मिलाकर बिहार में सैनिक स्कूलों की कुल संख्या दो है और कुल सीटें लगभग 165 (कक्षा 6 के लिए) हैं। अगर कक्षा 9 की सीटें जोड़ दी जाएं, तो राज्य में कुल सीटों की संख्या लगभग 200 के करीब पहुँचती है।
इन स्कूलों में प्रवेश के लिए छात्र की आयु, योग्यता, मेडिकल फिटनेस और दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक है। प्रवेश परीक्षा में गणित, सामान्य ज्ञान, बुद्धिमत्ता और भाषा पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। Bihar Sainik School
लड़कियों के लिए खुला अवसर
पहले सैनिक स्कूलों में केवल लड़कों को ही प्रवेश मिलता था, लेकिन अब सरकार ने लड़कियों के लिए भी रास्ता खोल दिया है।
बिहार के दोनों सैनिक स्कूलों में अब 10% सीटें लड़कियों के लिए आरक्षित हैं। यह कदम “नारी सशक्तिकरण” की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
आरक्षण और कोटा नीति
सैनिक स्कूलों में होम-स्टेट कोटा के तहत बिहार के छात्रों को लगभग 67% सीटें दी जाती हैं, जबकि 33% सीटें अन्य राज्यों के लिए आरक्षित होती हैं।
इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL) और रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए भी अलग कोटा निर्धारित है।
बिहार में सैनिक स्कूलों की संख्या भले ही फिलहाल दो है, लेकिन राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय भविष्य में नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं।
नालंदा और गोपालगंज जैसे संस्थान राज्य के सैकड़ों छात्रों को अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और नेतृत्व की भावना सिखा रहे हैं। सीमित सीटों के बावजूद यहां हर वर्ष अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो युवाओं के बीच इस संस्थान की लोकप्रियता को दर्शाती है।

