Winter School Break: 5 जनवरी तक बंद रहेंगे स्कूल, जानें कब लौटेगी पढ़ाई पटरी पर

Winter School Break
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Winter School Break: इस बार सर्दियों में पढ़ने-लिखने वाले बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी और निजी—दोनों तरह के स्कूल 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक पूरी तरह बंद रहेंगे। आधिकारिक शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, विद्यार्थियों को इस बार पहले की तुलना में लंबा शीतकालीन अवकाश मिल रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि दिसंबर माह में कुल 21 दिनों तक ही स्कूल संचालित होंगे, जबकि 25 दिसंबर के बाद सभी शैक्षणिक गतिविधियाँ छुट्टियों के कारण स्थगित रहेंगी।

दिलचस्प बात यह है कि 25 दिसंबर से पहले दिसंबर में रविवार को छोड़कर कोई अतिरिक्त सार्वजनिक अवकाश निर्धारित नहीं किया गया है। यानी छुट्टियों का अधिकतर हिस्सा सीधे शीतकालीन अवकाश के रूप में दिया गया है।

बढ़ती ठंड, बढ़ा अवकाश

शिक्षा विभाग ने लगातार दूसरे वर्ष शीतकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। सामान्य तौर पर यह अवकाश 31 दिसंबर तक रहता था, लेकिन पिछले साल की तर्ज पर इस बार भी इसे 5 जनवरी तक बढ़ा दिया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में सर्दी का असर ज्यादा और लंबा देखने को मिलता है। पहले ऐसी परिस्थितियों में जिला कलेक्टरों को अलग-अलग जिलों में अलग-अलग आदेश जारी करने पड़ते थे, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती थी।

इस बार सुरक्षा और सुविधा—दोनों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही कैलेंडर में लंबी छुट्टियाँ तय कर दी गई हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को अत्यधिक ठंड, कोहरे और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाना है।

6 जनवरी से लौटेगी चहल-पहल

लंबे अवकाश के बाद स्कूल 6 जनवरी 2026 से फिर खुल जाएंगे। छुट्टियों के दौरान जहाँ बच्चे आराम करेंगे, वहीं शिक्षक नए सत्र की योजनाओं और बोर्ड परीक्षाओं की रणनीति पर काम करने का अवसर पाएंगे। अकादमिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह ब्रेक बच्चों के लिए तभी फायदेमंद होगा जब वे इसे सिर्फ मोबाइल और टीवी में न बिताएं, बल्कि पढ़ाई की हल्की-फुल्की पुनरावृत्ति और घर-परिवार के साथ समय का संतुलन बनाए रखें।

स्कूल दोबारा खुलने पर उम्मीद है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी और पढ़ाई अपनी सामान्य रफ्तार पकड़ लेगी। साथ ही, शीतकालीन अवकाश के बाद होने वाली परीक्षाओं व कक्षा-गत गतिविधियों के लिए भी छात्रों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल जाएगा। कुल मिलाकर, यह निर्णय मौसम और सुरक्षा को देखते हुए लिया गया एक संतुलित कदम माना जा रहा है।