Woolen Clothes Care Tips: सर्दियों का मौसम अब धीरे-धीरे विदा ले रहा है। सुबह-शाम की हल्की ठंड के बीच दिन में तेज धूप निकलने लगी है। ऐसे में स्वेटर, शॉल, कार्डिगन और जैकेट को अलमारी से निकालकर सुरक्षित रखने का वक्त आ गया है। लेकिन ऊनी कपड़ों को स्टोर करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन्हें सही तरीके से पैक करना। जरा-सी लापरवाही से कपड़ों में बदबू, सीलन, फंगस या कीड़े लग सकते हैं, जिससे अगली सर्दी में वही कपड़े पहनने लायक नहीं बचते।
इसीलिए जरूरत की खबर में आज हम आपको बता रहे हैं कि सर्दियों के कपड़े स्टोर करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या करना सही है और कौन-सी गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले कपड़े साफ और सूखे हों
ऊनी कपड़े स्टोर करने का सबसे अहम नियम है कि वे पूरी तरह साफ और पूरी तरह सूखे हों। कई लोग हल्के इस्तेमाल वाले स्वेटर या शॉल बिना धोए ही पैक कर देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है। कपड़ों में पसीना, स्किन ऑयल और धूल के कण रह जाते हैं, जो कीड़ों को आकर्षित करते हैं और बदबू का कारण बनते हैं। इसलिए स्टोरेज से पहले ऊनी कपड़ों को वूलन फ्रेंडली डिटर्जेंट से धोना जरूरी है।
सही तरीके से सुखाना क्यों है जरूरी
धोने के बाद ऊनी कपड़ों को निचोड़ना नहीं चाहिए। इससे उनके फाइबर खराब हो सकते हैं। अतिरिक्त पानी हल्के हाथ से दबाकर निकालें और कपड़ों को किसी सूखे कपड़े पर फैलाकर समतल सतह पर सुखाएं। तेज धूप में सुखाने से ऊन सख्त हो सकता है, इसलिए छायादार और हवादार जगह बेहतर होती है। पैक करने से पहले कम से कम 24 घंटे तक पूरी तरह सूखने देना जरूरी है, ताकि नमी का नामोनिशान न रहे।
स्टोरेज के लिए क्या है सही विकल्प
ऊनी कपड़ों को रखने के लिए कॉटन बैग या कपड़े के बॉक्स सबसे बेहतर माने जाते हैं। इनमें हवा का संचार बना रहता है, जिससे नमी जमा नहीं होती। प्लास्टिक बैग आमतौर पर एयरटाइट होते हैं और अगर कपड़ों में जरा-सी भी नमी रह जाए तो फंगस का खतरा बढ़ जाता है। अगर प्लास्टिक का इस्तेमाल करना मजबूरी हो, तो उसमें छोटे-छोटे छेद कर दें, ताकि हवा आती-जाती रहे।
नेफ्थलीन जरूरी है या नहीं
कई लोग सीलन और कीड़ों से बचाने के लिए नेफ्थलीन की गोलियां डालते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है। नेफ्थलीन नमी को नहीं सोखता और इससे निकलने वाली गैस सिरदर्द, एलर्जी और सांस की समस्या पैदा कर सकती है। अगर कपड़े अच्छी तरह सूखे हों और सही बैग में रखे जाएं, तो इसकी जरूरत नहीं पड़ती।
घरेलू और सुरक्षित विकल्प
नेफ्थलीन की जगह कपूर और नीम बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं। कपूर की खुशबू कीड़ों को दूर रखती है और यह एंटी-फंगल गुण भी रखता है। नीम की सूखी पत्तियां या नीम पाउडर को छोटे कपड़े के पाउच में बांधकर रखा जा सकता है। ये तरीके नेचुरल हैं और किसी तरह की केमिकल गैस नहीं छोड़ते।
मोड़कर रखें या टांगकर
ऊनी कपड़ों को मोड़कर रखना ज्यादा सही माना जाता है। हैंगर पर टांगने से स्वेटर और शॉल अपने वजन से खिंच सकते हैं और उनका शेप खराब हो सकता है। ऊन में इलास्टिसिटी कम होती है, इसलिए लंबे समय तक टांगने से कपड़े ढीले पड़ जाते हैं। सिर्फ हल्की ऊनी जैकेट को ही चौड़े और पैडेड हैंगर पर टांगा जा सकता है।
किन चीजों से रखें दूरी
ऊनी कपड़ों के साथ गीले या अधसूखे कपड़े बिल्कुल न रखें। परफ्यूम, डियोड्रेंट या केमिकल स्प्रे पास रखने से ऊन के फाइबर कमजोर हो सकते हैं। खाने-पीने की चीजें या उनके टुकड़े भी कीड़ों को आकर्षित करते हैं, इसलिए इन्हें अलमारी से दूर रखें।
आम गलतियां जो लोग करते हैं
सबसे आम गलती है कपड़ों को बिना धोए या अधसूखी हालत में पैक करना। इसके अलावा एयरटाइट प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल, नमी वाली जगह पर स्टोरेज और समय-समय पर कपड़ों को चेक न करना भी नुकसानदायक होता है।
अगर बदबू या फंगस लग जाए तो क्या करें
अगर स्टोरेज के दौरान कपड़ों में बदबू या फंगस लग जाए, तो उन्हें तुरंत बाहर निकालकर खुली हवा में रखें। हल्की धूप या हवादार छांव में फैलाकर सुखाएं। जरूरत पड़े तो गुनगुने पानी और वूलन डिटर्जेंट से दोबारा धोएं। पूरी तरह सूखने के बाद ही दोबारा स्टोर करें और साथ में नमी सोखने वाले पाउच जरूर रखें।

