Heart Attack Risk: आज की तेज रफ्तार जिंदगी, असंतुलित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आमतौर पर लोग दिल की बीमारियों के लिए मोटापा, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सिर्फ लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि आपका ब्लड ग्रुप भी दिल की सेहत पर असर डाल सकता है।
साल 2012 में प्रतिष्ठित जर्नल Arteriosclerosis, Thrombosis, and Vascular Biology में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में यह पाया गया कि कुछ खास ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हृदय रोगों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। इस शोध में लाखों लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया था।
‘O’ ब्लड ग्रुप: दिल के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित
शोध के मुताबिक, ‘O’ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम अपेक्षाकृत कम पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ब्लड ग्रुप में खून के थक्के बनने की संभावना कम होती है, जिससे धमनियों में रुकावट की आशंका घट जाती है।
यदि आपका ब्लड ग्रुप ‘O’ है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको कोई खतरा नहीं है, लेकिन आनुवंशिक रूप से आप अन्य ब्लड ग्रुप की तुलना में थोड़े सुरक्षित माने जाते हैं। फिर भी संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है।
‘Non-O’ ब्लड ग्रुप (A, B, AB): बढ़ सकता है जोखिम
अध्ययन में पाया गया कि ‘O’ ग्रुप की तुलना में A, B और AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा 6% से 23% तक अधिक हो सकता है। इसे ‘Non-O’ ग्रुप कहा जाता है।
Blood Group ‘A’
इस ग्रुप के लोगों में 60 साल की उम्र से पहले स्ट्रोक का खतरा अधिक देखा गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन व्यक्तियों में कुछ खास क्लॉटिंग फैक्टर्स का स्तर ज्यादा होता है, जिससे रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है।
Blood Group ‘AB’
‘AB’ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा ‘O’ ग्रुप की तुलना में 1.6 से 7 गुना तक अधिक पाया गया। हालांकि यह आंकड़ा विभिन्न अध्ययनों में अलग-अलग रहा है, लेकिन जोखिम का संकेत स्पष्ट है।
Blood Group ‘B’
‘B’ ग्रुप वालों में भी हृदय रोग की आशंका ‘O’ की तुलना में ज्यादा देखी गई, खासकर यदि अन्य जोखिम कारक जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर मौजूद हों।
क्यों बढ़ता है खतरा? वैज्ञानिक कारण
विशेषज्ञों ने ‘Non-O’ ब्लड ग्रुप में बढ़ते जोखिम के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं:
1. रक्त के थक्के (Clotting Factors)
‘Non-O’ ब्लड ग्रुप में ‘फैक्टर VIII’ और ‘वॉन विलेब्रैंड फैक्टर’ (von Willebrand Factor) जैसे प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है। ये प्रोटीन खून को गाढ़ा बनाने और थक्के जमाने में मदद करते हैं। यदि थक्का धमनियों में जम जाए तो ब्लॉकेज हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
2. सूजन (Inflammation)
कुछ शोध बताते हैं कि ‘Non-O’ ग्रुप के लोगों में इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स का स्तर ज्यादा हो सकता है। लंबे समय तक रहने वाली सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) धमनियों को सख्त बना देती है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बन सकती है।
क्या करें बचाव के लिए?
भले ही आपका ब्लड ग्रुप जोखिम बढ़ाने वाला हो, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
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रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
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संतुलित और कम वसा वाला आहार लें
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धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें
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ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं
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तनाव को नियंत्रित रखें
ब्लड ग्रुप हमारे जेनेटिक प्रोफाइल का हिस्सा है, जिसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन यह जानकारी हमें सतर्क रहने में मदद कर सकती है। अगर आप ‘Non-O’ ब्लड ग्रुप में आते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है—बस अपनी लाइफस्टाइल पर खास ध्यान दें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें। दिल की सेहत काफी हद तक आपके रोज़मर्रा के चुनावों पर निर्भर करती है।

