O Romeo Movie Review : विशाल भारद्वाज अब तक मकबूल, द ब्लू अम्ब्रेला, ओमकारा, सात खून माफ़, हैदर और ख़ुफ़िया जैसी कई फ़िल्में हमारे सामने पेश कर चुके है, जिनकी मूल आत्मा साहित्य की दुनिया से जुडी हुयी है। अब विशाल लेकर आये है ओ रोमियो, जो कि हुसैन ज़ैदी के नॉवेल माफिया क्वींस ऑफ़ मुंबई से प्रेरित है। शाहिद कपूर और विशाल की ये तीसरी फिल्म है, इससे पहले दोनों कमीने और हैदर में साथ काम कर चुके है।
फिल्म में शाहिद के किरदार का नाम है उस्तरा और उनके नाम की तरह उनकी एंट्री भी धमाकेदार होती है। उस्तरा एक खतरनाक सुपारी किलर है, अब आपको समझ आ चूका होगा उसका उस्तरा क्यों है। उस्तरा काम करता है खान साहब के लिए। जिस वक़्त आईबी के पुलिस अधिकारी इन दोनों की मदद से दूसरे गैंगस्टर्स को साफ़ करने में व्यस्त है, कहानी में एंट्री होती है अफशां की, जिसे खूंखार गैंगस्टर जलाल से बदला लेना है। वो जलाल और उसके साथियों की सुपारी लेकर उस्तरा के पास जाती है, अब इसके आगे क्या होता है, ये जानने के लिए आपको सिनेमाघर की ओर रुख करना होगा ।
निर्देशन के साथ साथ विशाल भारद्वाज ने संगीत का जिम्मा भी अपने कंधो पर उठा रखा है, जिसमे गुलज़ार ने अपने शब्दों का सहारा उन्हें दिया है। शाहिद कपूर ने एक बार फिर साबित किया है, कि अभी उनमे दमखम बाकि है। तृप्ति ने अफशां के किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है। वहीँ नाना पाटेकर जितनी देर भी स्क्रीन पर होते है, दमदार लगते है। अविनाश तिवारी अपने अंदाज़ से चौकाते है, हालाँकि उनके किरदार को निखारा जा सकता था। फिल्म की सबसे बड़ी खामी है इसका 2 घंटे 57 मिनट लंबा रनटाइम है।

