Single Screen Cinema: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में एक समय सिनेमा संस्कृति का सुनहरा दौर हुआ करता था, जब यहां करीब 140 ‘सिंगल-स्क्रीन’ सिनेमाघर हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ यह संख्या तेजी से घटती गई और अब शहर में 30 से भी कम ऐसे सिनेमाघर बचे हैं। हालांकि अब एक नई पहल के साथ इस पुराने दौर को फिर से जीवित करने की कोशिश शुरू हो चुकी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची में जल्द ही तीन नए सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघर खोले जाने वाले हैं। यह कदम न सिर्फ शहर के मनोरंजन उद्योग के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि इससे स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
नई पहल से जागी उम्मीद
इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे गायक, अभिनेता और उद्यमी नदीम जाफरी ने बताया कि यह पहल रक्षा आवास प्राधिकरण (DHA) के सहयोग से की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इनमें से दो सिनेमाघर लगभग तैयार हैं, जबकि तीसरे पर काम तेजी से चल रहा है।
हालांकि ये सभी सिनेमाघर DHA क्षेत्र में स्थित होंगे, लेकिन जाफरी इसे एक सकारात्मक शुरुआत मानते हैं। उनका कहना है कि यह कदम शहर के सांस्कृतिक और मनोरंजन परिदृश्य को फिर से जीवित करने में मदद करेगा।
सिनेमा का गिरता दौर
पिछले तीन दशकों में पाकिस्तान के फिल्म उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय फिल्मों की कमी, अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के महंगे आयात और खासतौर पर भारतीय फिल्मों पर लगे प्रतिबंध ने सिनेमाघरों के कारोबार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
इसी कारण कई पुराने और ऐतिहासिक सिनेमाघर बंद हो गए। कराची में कभी प्रसिद्ध रहे निशात सिनेमा, प्रिंस सिनेमा और बैम्बीनो सिनेमा जैसे प्रतिष्ठित हॉल अब इतिहास बन चुके हैं।
वितरक और निर्माता नदीम मांडवीवाला के अनुसार, 2019 के बाद भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध ने इस गिरावट को और तेज कर दिया। इसके अलावा हॉलीवुड फिल्मों के महंगे लाइसेंस और सीमित स्थानीय कंटेंट ने भी सिनेमाघरों की संख्या कम होने में भूमिका निभाई।
मल्टीप्लेक्स vs सिंगल-स्क्रीन
हाल के वर्षों में कराची में कुछ मल्टीप्लेक्स जरूर खुले हैं, लेकिन उनके टिकट आम दर्शकों की पहुंच से बाहर हैं। जहां आज मल्टीप्लेक्स में टिकट की कीमत 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है, वहीं 1990 के दशक में सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों में यही टिकट 100-150 रुपये में मिल जाया करता था।
यही वजह है कि सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की वापसी को आम जनता के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह न सिर्फ सस्ता मनोरंजन उपलब्ध कराएंगे, बल्कि बड़े पैमाने पर दर्शकों को फिर से सिनेमाघरों की ओर आकर्षित कर सकते हैं।
सिनेमा का सामाजिक महत्व
आर्ट काउंसिल ऑफ पाकिस्तान के सचिव ऐजाज फारुकी का मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज में भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं, वरिष्ठ अभिनेता मुस्तफा कुरैशी ने कहा कि फिल्में लोगों के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक सुरक्षित माध्यम होती हैं। उनके अनुसार, जब ऐसे प्लेटफॉर्म कम हो जाते हैं, तो समाज में तनाव बढ़ सकता है।
फिल्म समीक्षक उमैऱ अल्वी का मानना है कि अगर सरकार स्थानीय फिल्म उद्योग को बढ़ावा देती है और सस्ती टिकट दरों वाले सिनेमाघरों को प्रोत्साहित करती है, तो यह क्षेत्र फिर से फल-फूल सकता है।
क्या सिनेमा फिर लौटेगा?
कराची में सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की वापसी एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। जब तक स्थानीय फिल्म निर्माण को बढ़ावा नहीं मिलेगा और आम दर्शकों के लिए सुलभ मनोरंजन विकल्प उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक इस उद्योग की पूरी तरह से वापसी मुश्किल है।
फिर भी, इन तीन नए सिनेमाघरों के खुलने से यह उम्मीद जरूर जगी है कि कराची एक बार फिर अपने पुराने सिनेमा दौर को देख सकता है।
कराची में सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की वापसी केवल एक व्यावसायिक पहल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत है। यह कदम न सिर्फ फिल्म प्रेमियों के लिए खुशखबरी है, बल्कि पूरे मनोरंजन उद्योग के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

