Dhurandhar Review: रणवीर का दमदार जासूस अवतार, अक्षय खन्ना की धमाकेदार मौजूदगी और आदित्य धर का बेहतरीन निर्देशन

Dhurandhar Review
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Dhurandhar Review: फिल्म Dhurandhar मूल रूप से एक ही संदेश पर आधारित है—“ये नया हिंदुस्तान है, घर में घुसेगा भी और मारेगा भी।” मगर इस सरल विचार को निर्देशक आदित्य धर ने इतने सधे हुए तरीके से पेश किया है कि करीब साढ़े तीन घंटे की यह फिल्म आपको अपनी सीट से उठने नहीं देती। कहानी, कलाकारों की परफॉर्मेंस और निर्देशन—तीनों का तालमेल सिनेमाघरों में एक ज़ोरदार अनुभव बनाता है।

कहानी: लंबी लेकिन कसावदार

फिल्म की शुरुआत कंधार हाईजैक से होती है। आईबी चीफ अजय सान्याल (आर. माधवन) इस घटना का आक्रामक जवाब देना चाहते हैं, लेकिन तत्कालीन सरकार उनकी रणनीति को नजरअंदाज कर देती है। कुछ साल बाद संसद हमला होता है, जिसके बाद सरकार आखिरकार सान्याल के मिशन धुरंधर को मंजूरी देती है।

इस प्लान के तहत एजेंट हमजा (रणवीर सिंह) को अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान भेजा जाता है, जहां उसका पहला लक्ष्य है—लयारी के गैंगस्टर रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की गैंग में घुसपैठ करना। रहमान के बेटे को बचाकर वह खुद को टीम का हिस्सा साबित कर देता है।

इसी दौरान हमजा, पाकिस्तान सरकार के करीबी नेता जमील यमाली (राकेश बेदी) की बेटी एलीना (सारा अर्जुन) को अपने मिशन के लिए इमोशनली manipulate करता है और कहानी में एक प्रेम तत्व जुड़ता है। काम के सिलसिले में हमजा की मुलाकात आईएसआई चीफ मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) से होती है, जो उसकी आंखों के सामने 26/11 मुंबई हमला अंजाम देता है।

उधर, राजनीति की भूख में जमील यमाली, एसपी असलम चौधरी (संजय दत्त) को रहमान डकैत को खत्म करने के लिए तैयार करता है। आगे क्या हमजा रहमान को बचा पाएगा? क्या उसकी असलियत सामने आएगी? हमजा और एलीना का रिश्ता किस मोड़ पर पहुंचेगा? इन सभी सवालों के जवाब फिल्म के 3.5 घंटे के रनटाइम में मिलते हैं।

अभिनय: हर किरदार का दमदार असर

कास्टिंग फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है।

  • आर. माधवन कम स्क्रीन टाइम के बावजूद अपनी आंखों और एक्सप्रेशंस से कहानी का वजन बढ़ाते हैं।

  • रणवीर सिंह एकदम सीमित संवाद के साथ इतना प्रभाव छोड़ते हैं कि यह उनकी सबसे नियंत्रित और प्रबल परफॉर्मेंस में से एक लगती है।

  • अक्षय खन्ना फिल्म के असली सरप्राइज पैकेज हैं। उनकी मौजूदगी, निगाहें और संवाद—सब दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ते हैं।

  • सारा अर्जुन अपनी सादगी और मासूमियत से किरदार को बखूबी निभाती हैं।

  • संजय दत्त का रोल छोटा लेकिन बेहद असरदार है।

  • अर्जुन रामपाल का किरदार भले थोड़ा कम हो लेकिन उनका डर पैदा करने वाला अंदाज़ काम करता है।

  • राकेश बेदी अपने चतुर, गिरगिट जैसे किरदार से फिल्म में हल्का-फुल्का ह्यूमर लेकर आते हैं।

छोटे किरदार निभाने वाले मानव गोहिल और सौम्या टंडन जैसे कलाकार भी प्रभावित करते हैं।

निर्देशन: आदित्य धर का सूक्ष्म नियंत्रण

आदित्य धर ने Uri की तरह इस फिल्म में भी दर्शकों की नब्ज पकड़ कर रखी है। पाकिस्तान की गलियों, पॉलिटिकल सेटअप और आतंकवाद के माहौल को उन्होंने बारीकी से रचा है। फिल्म में कई दृश्य इतने वास्तविक लगते हैं कि दिल दहल जाता है।

संवाद भी तगड़े हैं—

  • “किस्मत की खूबसूरती है कि वो वक्त आने पर बदलती है।”

  • “जब जीतने के लिए लड़ते हो, नजर और सब्र दोनों रखने पड़ते हैं।”

फिल्म में कॉमेडी भी संतुलित रूप में डाली गई है, जो इस गंभीर कहानी को हल्का नहीं होने देती। गाने और लव स्टोरी को कहानी में स्वाभाविक ढंग से जोड़ा गया है। असली घटनाओं के फुटेज और ऑडियो भी शामिल किए गए हैं, जिससे कहानी की गंभीरता बढ़ती है।

एक्शन, VFX और तकनीक

एक्शन सीक्वेंस दमदार हैं और फिल्म की रफ्तार बढ़ाते हैं। हिंसा है, लेकिन उद्देश्यपूर्ण है। VFX का इस्तेमाल सीमित और सटीक है। BGM सिचुएशन के अनुसार बदलता है और पुराने गानों का अप्रत्याशित उपयोग कई दृश्यों को खास बनाता है।

नए भारत का नया सिनेमा

Dhurandhar एक बड़े स्केल का, भावनात्मक और राजनीतिक रूप से तीखा सिनेमैटिक अनुभव है। लंबे रनटाइम के बावजूद फिल्म उबाऊ नहीं लगती। यह A-रेटेड फिल्म है—इसलिए परिवार के साथ देखने से बचें। लेकिन अगर आपको इंटेलिजेंस ऑपरेशन, रियलिस्टिक एक्शन और सशक्त परफॉर्मेंस पसंद हैं, तो यह फिल्म जरूर देखें।