Bhooth Bangla Review : हँसाने और डराने में नाकाम, फर्स्ट डे कलेक्शन भी निराशाजनक

Bhooth Bangla Review: Fails to Amuse or Terrify; First-Day Collection Also Disappointing
Bhooth Bangla Review: Fails to Amuse or Terrify; First-Day Collection Also Disappointing

Bhooth Bangla Review : निर्देशक प्रियदर्शन का नाम ही काफी है दर्शको को सिनेमाघरों तक खीच लाने के लिए। बॉलीवुड में प्रियदर्शन ने हेरा फेरी, हलचल और हंगामा जैसी बेहतरीन कॉमेडी फ़िल्में दी है, वहीँ अक्षय कुमार के साथ इनकी जोड़ी हर दिल अजीज है। इस जोड़ी ने अब तक हेरा फेरी, गरम मसाला, भागम भाग, भूल भुलैया, दे दना दन और खट्टा मिट्ठा जैसी फिल्मे दी है, हालाँकि रिलीज के समय दे दना दन और खट्टा मिट्ठा कुछ खास असर नहीं दिखा पाई थी, मगर आज हर कोई इन फिल्मों को पसंद करता है। ऐसे में 14 साल बाद फिर इस जोड़ी की वापसी से लोगों को काफी उम्मीद थी। फिल्म इस शुक्रवार रिलीज हो चुकी है, फिल्म में अक्षय कुमार होने के बावजूद देश के गिने चुने सिनेमाघर ही होंगे जिसमे ये फिल्म हाउसफुल गयी हो।

यदि आपने 1979 में आई राजकुमार कोहली की बेहतरीन हॉरर फिल्म जानी दुश्मन देखी है तो आपको प्रियदर्शन की भूत बंगला उसी का रीमेक भी लग सकती है, क्योंकि कहानी का प्लाट लगभग मिलता जुलता है। मंगलपुर नाम का एक गाँव है जहाँ शादी की रात दुल्हन को कोई शैतानी शक्ति उठा ले जाती है, जिसकी वजह से उस गाँव में कोई शादी नहीं करता या शादी करने के लिए उसे गंगा नदी पार कर दूसरे गाँव जाना पड़ता है। याद कीजिये जानी दुश्मन में संजीव कुमार का वो भयानक किरदार जो लाल जोड़े में नयी नवेली दुल्हन को देख, उसको उठाकर ले जाता था, हालाँकि दोनों का ऐसा करने का कारण अलग अलग है। भूत बंगला की बात करे तो अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) अपनी बहन की शादी करवाने के लिए विदेश से भारत अपने पुस्तैनी महल में आता है, जो कि मंगलपुर में है। यहाँ सब उसे इस शैतानी ताकत के बारे में बताते है, मगर अर्जुन सबको एक सिरे से नकार देता है और अपनी बहन की शादी उसी महल में कराने का प्रण लेता है। क्या अर्जुन अपनी बहन की शादी करा पाता है, या शैतानी शक्ति उसकी बहन को भी उठा के ले जाती है, आखिर इस गाँव में ऐसा क्यों हो रहा है, ये जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना पड़ेगा।

फिल्म के मुख्य स्टार अक्षय कुमार है तो ऐसे में उनसे ज्यादा उम्मीद होती है, मगर वो अब जो सिल्वर स्क्रीन पर करते है लोग उन्हें ये सब करते हुए कई बार देख चुके है, वहीँ पंच मारने का स्टाइल, वो ही फेस रिएक्शन, इस फिल्म में भी बस वो अपने आप को रिपीट कर रहे है, हालाँकि इस फिल्म में अक्षय डबल रोल में है और माधव के रोल में वो अच्छे लगते है। इसके अलावा फिल्म में अक्षय कुमार से जुड़ा एक सरप्राइज भी है जो कि इंटरवल में रिविल होता है। तब्बू के लिए फिल्म में कुछ खास नहीं था और मुश्किल से वो स्क्रीन पर 15 मिनट ही नज़र आती है। कास्टिंग डायरेक्टर को लेकर थोडा सा अचम्भा होता है कि उसने क्या सोच कर जिस्सू सेनगुप्ता को अक्षय कुमार के पिता के किरदार के लिए चुना, जिस्सू नकली सफ़ेद बाल लगाने और मेकअप के बाद भी अक्षय कुमार से जवान लग रहे थे, जो कि वो है भी। इसी तरह दूल्हे की दादी को ज़बरदस्ती सफ़ेद बाल पहना के उम्रदराज दिखाने की कोशिश की गयी, जबकि बोलचाल के तरीके से वो उम्रदराज नहीं लगती है। वामिका गब्बी और मिथिला पालकर दोनों स्क्रीन पर अच्छी लगती है, मगर फिल्म में उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं है। इसके अलावा फिल्म में परेश रावल, राजपाल यादव, मनोज जोशी, राजेश शर्मा और जाकिर हुसैन जैसे मंझे हुए कलाकार होने के बावजूद फिल्म में जान फूंकने में नाकाम रहते है। परिणामस्वरूप फिल्म हँसाने और डराने दोनों में नाकाम साबित होती है।

विकिपीडिया के अनुसार इस फिल्म ने पहले दिन 23 करोड़ का बिजनेस किया है, जबकि इस फिल्म का बजट 120 करोड़ है। अधिकांश रिव्यु नेगेटिव ही आ रहे है इस फिल्म के, ऐसे में 120 करोड़ का बजट न सिर्फ कवर करना, बल्कि मुनाफा कमाना भी इस फिल्म के लिए एक चुनौती बनकर उभर रही है । अब देखना है कि ये फिल्म शनिवार और रविवार को क्या जादू चला पाती है।