आज के समय में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन चुकी है। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा, लूटपाट, छीनाझपटी, छेड़छाड़, अपहरण और दुर्व्यवहार जैसी घटनाएँ लगातार सामने आती रहती हैं। बाज़ार, बस या ट्रेन में सफर करते समय, ऑटो में, लिफ्ट में, गली-मोहल्लों में या कभी-कभी अपने ही आसपास के परिचित माहौल में भी महिलाएँ असुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे माहौल में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि महिलाएँ केवल दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सुरक्षा के प्रति स्वयं जागरूक और सक्षम बनें।
मैं, 53 वर्षीय मार्शल आर्टिस्ट के रूप में, वर्षों से महिलाओं को आत्मरक्षा और आत्मविश्वास के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रही हूँ। मुझे यह सौभाग्य मिला है कि मार्शल आर्ट्स, फिटनेस और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में मेरे नाम 84 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिनमें 18 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी शामिल हैं। मेरे अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि यदि महिला मानसिक रूप से मजबूत, सतर्क और आत्मरक्षा के कौशल से लैस हो, तो वह किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर सकती है।
जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी किसी भी खतरे से बचाव की शुरुआत जागरूकता से होती है।
अक्सर खतरा तब बढ़ता है जब हम अपने आसपास के माहौल पर ध्यान नहीं देते। सड़क पर चलते समय, सार्वजनिक परिवहन में सफर करते हुए, मॉल, पार्किंग या किसी सुनसान स्थान पर रहते समय अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। सतर्कता कई बार हमें ऐसी परिस्थितियों से बचा लेती है, जिनका अंदेशा भी नहीं होता।
छठी इंद्रिय के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें
अक्सर हमारा मन हमें पहले ही चेतावनी दे देता है कि कोई स्थिति सुरक्षित नहीं है। महिलाओं की छठी इंद्रिय विशेष रूप से संवेदनशील होती है। यदि किसी व्यक्ति, स्थान या परिस्थिति को लेकर आपको असहजता महसूस हो रही हो, तो उस संकेत को अनदेखा न करें। अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तुरंत सही निर्णय लेना सीखें।
खतरे से बच निकलना भी समझदारी है
हर स्थिति में बहादुरी दिखाना जरूरी नहीं होता, कई बार समझदारी से उस जगह से निकल जाना ही सबसे अच्छा विकल्प होता है। यदि कोई व्यक्ति जबरन आपको किसी वाहन या एकांत स्थान पर ले जाने की कोशिश करे, तो उसके साथ जाने की गलती कभी न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वहां से दूर होने की कोशिश करें और मदद मांगें आत्मरक्षा आपका अधिकार है।
यदि कोई व्यक्ति आप पर हमला करता है और आपके पास बचने का कोई विकल्प नहीं बचता, तो शारीरिक रूप से अपना बचाव करना आपका कानूनी और नैतिक अधिकार है। भारतीय दंड संहिता की धारा 96 से 106 तक हर व्यक्ति को आत्मरक्षा का अधिकार प्रदान करती है। ऐसी स्थिति में जोर से चिल्लाना, लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपनी पूरी ताकत से प्रतिरोध करना बेहद जरूरी है।
आत्मविश्वास से बढ़ती है सुरक्षा
अक्सर अपराधी उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो कमजोर या डरे हुए दिखाई देते हैं। इसलिए जरूरी है कि महिलाएँ अपने व्यवहार और चाल-ढाल में आत्मविश्वास बनाए रखें। सिर झुकाकर चलने के बजाय सतर्कता के साथ सामने देखते हुए चलें। यदि कोई व्यक्ति अभद्र टिप्पणी करे या छेड़छाड़ करे, तो घबराने के बजाय पूरे आत्मविश्वास के साथ उसका विरोध करें।
आत्मरक्षा का प्रशिक्षण जरूरी
आज के दौर में आत्मरक्षा की कला सीखना समय की जरूरत बन गया है। कराटे, ताइक्वांडो, जूडो या अन्य सेल्फ-डिफेंस तकनीकें न केवल शरीर को मजबूत बनाती हैं बल्कि मन में आत्मविश्वास भी पैदा करती हैं। स्कूलों, कॉलेजों और फिटनेस सेंटरों में उपलब्ध आत्मरक्षा प्रशिक्षण महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।
सुरक्षा के छोटे-छोटे साधन भी बन सकते हैं मददगार
महिलाओं को अपने पर्स में कुछ ऐसी चीजें भी रखनी चाहिए जो जरूरत पड़ने पर सुरक्षा में सहायक हो सकती हैं। जैसे—पेपर स्प्रे, सेफ्टी अलार्म, नेल कटर, छोटा पेचकस या खाने का कांटा। कई बार डियोड्रेंट, पेन, हेयरपिन, छाता या पर्स भी आत्मरक्षा के साधन बन सकते हैं। याद रखें, आत्मरक्षा में ताकत से ज्यादा महत्वपूर्ण है सही समय पर सही तरीके से प्रतिक्रिया देना।
अंततः महिला सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और स्वयं महिलाओं की जागरूकता से भी जुड़ी हुई है। यदि महिलाएँ आत्मविश्वासी, सजग और आत्मरक्षा के कौशल से सशक्त हों, तो वे न केवल खुद को सुरक्षित रख सकती हैं बल्कि समाज में अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

