Ghaziabad Triple Suicide: उत्तर प्रदेश के Ghaziabad में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए डिजिटल खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस द्वारा फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए मोबाइल फोन से जो डेटा बरामद हुआ है, उसने मामले को एक नई दिशा दे दी है। शुरुआती विश्लेषण में सामने आया है कि तीनों बहनें कथित तौर पर रोजाना करीब 20 घंटे मोबाइल पर ऑनलाइन कंटेंट देखती थीं।
घटना और जांच की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार 16, 14 और 12 वर्ष की तीनों बहनों ने 4 फरवरी को सोसायटी की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। घटना के बाद पुलिस ने हर एंगल से जांच शुरू की। इसी दौरान यह जानकारी मिली कि उनके पिता चेतन कुमार ने घटना से लगभग 15 दिन पहले बेटियों का मोबाइल फोन शालीमार गार्डन की एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान पर 15,000 रुपये में बेच दिया था।
जांच एजेंसियों ने उस डिवाइस को बरामद कर डिलीट डेटा रिकवर कराया। फोरेंसिक टीम ने इंटरनेट हिस्ट्री, ऐप्स और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया, जिससे कई अहम जानकारियां सामने आईं।
ऑनलाइन गतिविधियों का पैटर्न
जांच अधिकारी के मुताबिक, मोबाइल डेटा से यह स्पष्ट हुआ कि बहनों की कोरियन कल्चर और खासकर K-pop में गहरी रुचि थी। इसके अलावा वे कार्टून, गेमिंग वीडियो और एशियाई देशों से जुड़े डिजिटल कंटेंट भी नियमित रूप से देखती थीं।
फोन में कुछ हॉरर गेम्स से जुड़ी सामग्री भी पाई गई, जिनमें Poppy Playtime, The Baby in Yellow, Ice Scream और Evil Nun जैसे टाइटल शामिल थे। पुलिस इन गेम्स के संभावित मनोवैज्ञानिक प्रभाव को भी जांच के दायरे में रख रही है।
YouTube चैनल और सोशल मीडिया
फोरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि बहनों ने 2025 में K-ड्रामा और कार्टून कैरेक्टर आधारित एक यूट्यूब चैनल शुरू किया था। इस चैनल के 2,000 से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। हालांकि, घटना से करीब 10 दिन पहले चैनल को डिलीट कर दिया गया था।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या चैनल हटाने के पीछे पारिवारिक आपत्तियां या किसी अन्य प्रकार का दबाव था। मोबाइल की YouTube हिस्ट्री में कोरियन, चीनी, थाई और जापानी कंटेंट की लंबी सूची पाई गई है। साथ ही कार्टून और गेमिंग वीडियो भी नियमित रूप से देखे जाते थे।
कोविड के बाद सामाजिक बदलाव
अधिकारियों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद तीनों बहनों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। उनके सामाजिक दायरे में काफी कमी आई और वे ज्यादातर समय घर के अंदर और ऑनलाइन दुनिया में बिताने लगीं। पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही है, क्योंकि सामाजिक अलगाव और डिजिटल निर्भरता के बीच संबंध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने कुछ गेम्स को लेकर सरकार को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें एहतियाती कदम उठाने की सिफारिश की गई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी फोरेंसिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर डिजिटल उपयोग, किशोर मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद की अहमियत पर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

