Delhi cyber fraud: राजधानी Delhi में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Delhi Police ने एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो ‘म्यूल’ बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सोनू कुमार और अमिंदर सिंह के रूप में हुई है। दोनों एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के फर्जी निदेशक बनकर इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह कंपनी असल में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का एक बड़ा केंद्र थी। आरोपियों ने ‘म्यूल’ बैंक खातों का इस्तेमाल करते हुए अवैध तरीके से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया। ‘म्यूल’ खाते वे बैंक खाते होते हैं, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खोले जाते हैं और जिनका इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध की शिकायतों की निगरानी करने वाले National Cyber Crime Reporting Portal पर कुछ संदिग्ध खातों को चिह्नित किया गया। इसके साथ ही Indian Cyber Crime Coordination Centre के “समन्वय” पोर्टल के जरिए भी अहम जानकारी मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस की नजर बवाना स्थित एक बैंक शाखा में खुले एक खाते पर गई, जो इस फर्जी कंपनी से जुड़ा हुआ था। इस खाते को लेकर संदेह तब और गहरा गया जब पता चला कि यह देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की करीब 336 शिकायतों से जुड़ा हुआ है। यह संख्या इस बात का संकेत थी कि मामला बेहद गंभीर और बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
आगे की जांच में पुलिस ने पाया कि इस बैंक खाते में असामान्य गतिविधियां हो रही थीं। पैसे का लेन-देन कई स्तरों पर किया जा रहा था, जिससे इसकी असल स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके। जब वित्तीय लेन-देन का गहराई से विश्लेषण किया गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—सिर्फ आठ दिनों के भीतर इस खाते के जरिए 16 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन किया गया था।
यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि नेटवर्क काफी संगठित और बड़े पैमाने पर सक्रिय था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में कई लोग और संस्थाएं शामिल होती हैं, जो अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, लेकिन नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचना अभी बाकी है। फिलहाल, जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।
इस मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं और बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी संदिग्ध लेन-देन या गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए।

