सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की उपलब्धियों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि अप्रैल 2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 55 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 34 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण बिना किसी गारंटी के स्वीकृत किया जा चुका है। इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन लोगों को औपचारिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया था, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लक्ष्य समाज के वंचित, कमजोर और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले उद्यमियों को सशक्त बनाना है। प्रारंभिक वर्षों में इस योजना के तहत अधिकतम ऋण सीमा 10 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। लेकिन छोटे व्यवसायों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए, 2024-25 के केंद्रीय बजट में इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे लाखों छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स, स्व-रोजगार से जुड़े लोगों और माइक्रो-उद्यमियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वित्त राज्य मंत्री पंजाब नेशनल बैंक द्वारा आयोजित शिविर ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ में बोल रहे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने में सफल रही है, बल्कि इससे छोटे व्यवसायों की संख्या में बढ़ोतरी, रोजगार सृजन और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों की मजबूती भी देखने को मिली है। उनका कहना था कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चौधरी ने आगे कहा कि ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान के तहत सरकार निष्क्रिय और बिना दावे वाली संपत्तियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक बैंक खाते में चार नामांकित व्यक्तियों को जोड़ने की सुविधा दी गई है, जिससे दावों के निपटान की प्रक्रिया और पारदर्शी व सरल हो सकेगी।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इन सुधारों के बावजूद अभी और काम करने की जरूरत है, ताकि देशभर में फैली बिना दावे वाली संपत्तियों से संबंधित समस्याओं का पूरी तरह समाधान हो सके।
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 4 अक्टूबर को वित्तीय क्षेत्र में पड़ी अनक्लेम्ड एसेट्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए तीन महीने का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को उनकी निष्क्रिय पूंजी पर अधिकार दिलाना और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है। इसका नाम भी इसी विचार को दर्शाता है—‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’।
सरकार का कहना है कि मुद्रा योजना और जागरूकता अभियान, दोनों ही कदम वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और सामान्य नागरिकों को अपनी आर्थिक संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण देने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण प्रयास हैं। इन पहलों के ज़रिए सरकार जमीनी स्तर पर आर्थिक परिवर्तन लाने की उम्मीद कर रही है।

