Gold Investment Trend: भारत में सोने को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले सोना मुख्य रूप से आभूषणों के लिए खरीदा जाता था, वहीं अब अधिक संख्या में लोग इसे निवेश के रूप में देख रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में निवेश के लिए सोना खरीदने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल सोने की खरीद के पैटर्न में यह बदलाव एक महत्वपूर्ण संकेत है। पहले जहां आभूषणों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत के दीर्घकालिक औसत के आसपास रहती थी, वहीं 2025 में यह घटकर 60 प्रतिशत से नीचे आ गई है।
बदलती प्राथमिकताएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ अस्थायी नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है। CareEdge के निदेशक Akhil Goyal के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं के सोना खरीदने के तरीके में संरचनात्मक परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सोने की बढ़ती कीमतें और निवेश पोर्टफोलियो को विविध बनाने की बढ़ती जरूरत इस बदलाव को गति दे रही हैं। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक कुल सोने की खपत में निवेश की हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग
भारत में सोने की निवेश मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। खासतौर पर Gold ETF, सोने की ईंट (बार) और सिक्कों की खरीद में तेजी देखी जा रही है। यह संकेत देता है कि लोग अब सोने को केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में अपना रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोना एक “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान तेजी से इस ओर बढ़ रहा है।
आभूषणों की मांग में गिरावट
हालांकि आभूषणों की मांग अभी भी कुल खपत का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन इसमें गिरावट साफ दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आभूषणों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत के आसपास है, जो वैश्विक औसत 50 प्रतिशत से अभी भी अधिक है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में कम है।
इसका मतलब यह है कि भारतीय उपभोक्ता पारंपरिक सोच से हटकर अब अधिक व्यावहारिक और निवेश-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
बढ़ती कीमतों का असर
सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भी इस बदलाव का एक बड़ा कारण है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोना अब एक “हाई-वैल्यू फेज” में प्रवेश कर चुका है, जहां इसकी कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
इसका समर्थन कई कारकों से मिल रहा है, जैसे:
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद
- निवेशकों की सुरक्षित विकल्प की तलाश
इन सभी कारणों से सोने की मांग में स्थायी बदलाव देखने को मिल रहा है।
भविष्य की दिशा
आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और मजबूत होने की संभावना है। निवेश के रूप में सोने की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ नए निवेश विकल्प जैसे डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF भी इस बदलाव को गति देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो भारत में सोने की खपत का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है, जहां आभूषणों की बजाय निवेश प्रमुख भूमिका निभाएगा।
भारत में सोने की खरीद का तरीका तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक आभूषणों की जगह अब निवेश के रूप में सोना अधिक लोकप्रिय हो रहा है। यह बदलाव न केवल उपभोक्ताओं की सोच में परिवर्तन को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय जागरूकता के बढ़ते स्तर को भी दर्शाता है।

