एजुकेशन टुमारो कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025: चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर होगा मंथन

Education Tomorrow Conclave & Awards 2025
Education Tomorrow Conclave & Awards 2025, AI and the Next Frontier of higher education

चंडीगढ़ | तेज़ी से बदलती दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र को बदल रहा है—चाहे वह उद्योग हो, शोध हो या शिक्षा। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए यह सवाल बेहद अहम हो गया है कि आने वाली पीढ़ियों को इस बदलाव के लिए कैसे तैयार किया जाए। इसी उद्देश्य को लेकर एजुकेशन टुमारो कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025 का आयोजन 15 अक्टूबर को चंडीगढ़ में किया जा रहा है।इस वर्ष का विषय “AI and the Next Frontier of Higher Education” (एआई और उच्च शिक्षा का अगला मोर्चा) रखा गया है। इसका मकसद यह समझना है कि किस तरह एआई न केवल कक्षाओं और अध्यापन की परिभाषा बदल रहा है बल्कि रोजगार और कौशल विकास की दिशा भी तय कर रहा है।

बदलते समय के लिए समयानुकूल आयोजन

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अब वर्चुअल लैब्स, डिजिटल क्लासरूम, एआई चैटबॉट्स और पर्सनलाइज्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म हकीकत बन चुके हैं। लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं—क्या मशीनें शिक्षक की भूमिका को कमज़ोर कर देंगी? क्या शिक्षा पूरी तरह से तकनीक-निर्भर हो जाएगी? और क्या इससे मानवीय संवेदनाएं पीछे छूट जाएंगी? इन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए यह कॉन्क्लेव एक सहयोगी मंच बनेगा, जहां अकादमिक जगत, नीति निर्माता और उद्योग के नेता मिलकर दिशा तय करेंगे।

मुख्य अतिथि

  • कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दो प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी:
  • डॉ. चंद्रशेखर बुद्धा, CEO – Anuvadini AI एवं मुख्य समन्वय अधिकारी, AICTE, भारत सरकार
  • डॉ. जतिंदर पाल सिंह, उप निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, पंजाब सरकार

इनकी मौजूदगी से इस बात की उम्मीद है कि कॉन्क्लेव में हुई चर्चाएं केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि शिक्षा नीतियों और योजनाओं पर भी असर डालेंगी।

शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी

इस कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी ताक़त है इसमें भाग लेने वाले वक्ताओं और विशेषज्ञों की लंबी सूची। इनमें देश के नामचीन विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक और शिक्षा नीति विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • अंशु कटारिया, चेयरमैन, आर्यन ग्रुप ऑफ कॉलेजेज
  • प्रो. (डॉ.) मनप्रीत सिंह मन्ना, कुलपति, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
  • डॉ. मनोज मनुजा, कुलपति, गीता यूनिवर्सिटी
  • डॉ. एम. एल. गौड़, मुख्य सलाहकार, रावतपुरा सरकार ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स, म.प्र. एवं एकेडमिक बोर्ड सदस्य, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी
  • प्रो. (डॉ.) देवेंद्र शर्मा, कुलपति, HRIT यूनिवर्सिटी
  • डॉ. संजय बहल, कुलपति, इंदुस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी
  • अंकुर गिल, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, SVIET
  • प्रो. डॉ. विजय कुमार बंगा, डायरेक्टर, गोविंद बल्लभ पंत इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, उत्तराखंड
  • सुबर्णो भट्टाचार्य, असिस्टेंट डायरेक्टर, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी
  • डॉ. अमित जैन, डायरेक्टर, इंदरप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज
  • प्रो. हनी शर्मा, कैंपस डायरेक्टर, गुलजार ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट्स
  • प्रो. (डॉ.) गुरप्रीत सिंह, डायरेक्टर – ऑनलाइन, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
  • प्रो. (डॉ.) पंकज गुप्ता, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (CESM) एवं सीनियर फेलो, जिंदल इंडिया इंस्टीट्यूट, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी
  • प्रो. (डॉ.) परविंदर सिंह, पूर्व कुलपति, रायट बहरा यूनिवर्सिटी
  • डॉ. रघुवीर वी.आर., प्रो-वाइस चांसलर (अकादमिक अफेयर्स), चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
  • प्रो. (डॉ.) रमणदीप सैनी, डायरेक्टर-प्रिंसिपल, चंडीगढ़ बिज़नेस स्कूल ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन
  • डॉ. अश्वनी कुमार भल्ला, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एवं प्रिंसिपल, उच्च शिक्षा विभाग, पंजाब सरकार
  • डॉ. मोनिका पेंडुकेनी सह-संस्थापक एवं काउंसिल चेयरपर्सन वेलविचिया विश्वविद्यालय

एआई: शिक्षा का सहयोगी या चुनौती?

कॉन्क्लेव में सबसे अहम चर्चा इसी पर होगी कि क्या एआई शिक्षा के लिए विघटनकारी तकनीक (disruptor) है, या फिर एक सहयोगी जो शिक्षकों की भूमिका को और मज़बूत करता है। आज कई विश्वविद्यालय एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं—छात्रों की परामर्श सेवाओं से लेकर एडमिशन एनालिटिक्स और पर्सनलाइज्ड स्टडी प्लान तक। यह सिस्टम शिक्षा को सहज और सुलभ बना रहे हैं। लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इससे छात्रों का डेटा सुरक्षित रहेगा और क्या यह शिक्षा को मानवीय स्पर्श से दूर कर देगा।

एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ का कहना है, “AI को शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी ताक़त बढ़ाने वाला उपकरण माना जाना चाहिए। असली शिक्षा अब भी शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते में ही है।”

शिक्षा और उद्योग की साझेदारी

एक और महत्वपूर्ण विषय होगा—शिक्षा और उद्योग के बीच का अंतर कैसे कम किया जाए। आज उद्योग केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल (skills) की मांग कर रहा है। एआई ने भर्ती, प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट को पहले से ही बदल दिया है। कॉन्क्लेव में HR और L&D विशेषज्ञ भी शामिल होंगे जो उद्योग की ज़रूरतों और विश्वविद्यालयों की तैयारियों के बीच पुल का काम करेंगे।

चंडीगढ़ क्यों चुना गया?

चंडीगढ़ को इस आयोजन का मेजबान बनाना भी प्रतीकात्मक है। शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में यह शहर हमेशा से अग्रणी रहा है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के बीच स्थित यह केंद्र भारत के उभरते शिक्षा केंद्रों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

अवार्ड्स से मिलेगा प्रोत्साहन

इस आयोजन में एजुकेशन टुमारो अवार्ड्स 2025 भी दिए जाएंगे। इन अवार्ड्स के ज़रिए उन संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने एआई, डिजिटल लर्निंग और स्किल-आधारित शिक्षा में नवाचार किया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?

भारत अगले कुछ वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी कार्यशील आबादी वाला देश बनने जा रहा है। ऐसे में यह ज़रूरी है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करे। यह कॉन्क्लेव केवल विचारों का मंच नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा और व्यावहारिक समाधान देने वाला मंच साबित हो सकता है। यही वजह है कि इस पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।

आगे की राह

अगर भारत को शिक्षा में तकनीक का नेतृत्व करना है तो उसे संतुलन साधना होगा—तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच, नवाचार और समावेशिता के बीच। एजुकेशन टुमारो कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2025 केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह भविष्य की राष्ट्रीय वार्ता है। इसमें तय होगी वह राह, जिस पर चलकर भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था न केवल भविष्य के लिए तैयार होगी, बल्कि आने वाले दशकों में दुनिया को दिशा देने की क्षमता भी रखेगी।