RBI ने 35 एनबीएफसी का पंजीकरण रद्द किया, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

RBI
RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नियामकीय नियमों का पालन न करने के कारण 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का पंजीकरण रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों को अब भारत में किसी भी प्रकार का गैर-बैंकिंग वित्तीय व्यवसाय करने की अनुमति नहीं होगी।

आरबीआई द्वारा 7 जनवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की गई है। सर्कुलर में कहा गया है कि जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, वे अब एनबीएफसी के रूप में कोई भी वित्तीय गतिविधि नहीं कर सकतीं।

केंद्रीय बैंक ने आम जनता को भी सतर्क करते हुए सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय लेन-देन या निवेश से पहले संबंधित संस्था की नियामकीय स्थिति (Regulatory Status) अवश्य जांच लें, ताकि धोखाधड़ी और वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।

आरबीआई द्वारा जारी बयान

आरबीआई ने अपने सर्कुलर में कहा,
“भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाते हैं।”

जिन 35 एनबीएफसी का पंजीकरण रद्द हुआ, उनकी सूची

  1. सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

  2. ए जी सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

  3. एएलबी लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड

  4. एटीएम क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्रा. लि.

  5. कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्रा. लि.

  6. डिसाइसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

  7. डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

  8. लिबर्टी प्रा. लि. सेल्स

  9. पर्ल्स हायर परचेज कॉरपोरेशन लिमिटेड

  10. क्वासर इंडिया फिनकैप प्रा. लि.

  11. सनलाइफ सिक्योरिटीज प्रा. लि.

  12. सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

  13. स्विटो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्रा. लि.

  14. त्रिवेणी विनिमय प्रा. लि.

  15. ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड

  16. यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड

  17. वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्रा. लि.

  18. विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्रा. लि.

  19. शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड

  20. अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्रा. लि.

  21. अग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड

  22. अहुसन्स फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्रा. लि.

  23. आल्टर इन्वेस्टमेंट प्रा. लि.

  24. एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड

  25. अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड

  26. बीएचएल फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड

  27. भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

  28. दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्रा. लि.

  29. ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्रा. लि.

  30. इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्रा. लि.

  31. ईएसएन फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड

  32. एफएमआई इन्वेस्टमेंट्स प्रा. लि.

  33. गणपति फिनकैप सर्विसेज प्रा. लि.

  34. गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्रा. लि.

  35. गोपाल ओवरसीज प्रा. लि.

आरबीआई के अनुसार, इन कंपनियों का पंजीकरण 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग तिथियों पर रद्द किया गया।

इस फैसले का क्या अर्थ है?

पंजीकरण रद्द होने के बाद, ये सभी कंपनियां अब एनबीएफसी के रूप में कोई भी वित्तीय कारोबार नहीं कर सकतीं, जैसा कि आरबीआई अधिनियम की धारा 45-I(a) में परिभाषित है। यदि इनमें से कोई कंपनी आगे भी ऐसा करती है, तो उसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

एनबीएफसी क्या होती है?

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) वह कंपनी होती है जो कंपनी अधिनियम, 1956 या 2013 के तहत पंजीकृत होती है और जिसका मुख्य कार्य ऋण देना, निवेश करना, लीजिंग, हायर-परचेज या प्रतिभूतियों में निवेश करना होता है। हालांकि, कृषि, औद्योगिक गतिविधि, वस्तुओं की खरीद-फरोख्त (सिक्योरिटीज को छोड़कर) या रियल एस्टेट से जुड़ी कंपनियां एनबीएफसी की श्रेणी में नहीं आतीं।

आरबीआई का यह कदम यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता, अनुशासन और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।