Silver Price Forecast: पिछले साल चांदी ने कमोडिटी मार्केट में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वायदा बाजार में चांदी का भाव 2.54 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से ऊपर निकल गया, जिससे यह सवाल और तेज हो गया कि आने वाले वर्षों में कीमतों का रुख आखिर कैसा रहेगा। क्या यह तेजी जारी रहेगी, या फिर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है? इसी मुद्दे पर कमोडिटी मार्केट के जाने-माने विशेषज्ञ अजय केडिया ने अपना आकलन साझा किया है।
अजय केडिया के अनुसार, चांदी के दामों में आई तेज उछाल किसी अस्थायी ट्रेंड का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मजबूत आधार मौजूद हैं। उनका कहना है कि 2025 में चांदी ने लगभग 175 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाई, और 2,54,174 रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया। यह बढ़त मुख्य रूप से वैश्विक सप्लाई की कमी, बढ़ती औद्योगिक मांग और अमेरिका द्वारा चांदी को एक “महत्वपूर्ण मिनरल” का दर्जा दिए जाने से जुड़ी है।
इसके साथ ही, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार कीमती धातुओं की खरीद कर रहे हैं, जबकि सिल्वर ईटीएफ में भी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। अजय केडिया का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहता है, तो 2026 में चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो का स्तर भी छू सकती है। कम ब्याज दरों की उम्मीद और सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता भी इस तेजी को समर्थन दे सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञ ने सिर्फ सकारात्मक तस्वीर ही नहीं दिखाई। उन्होंने यह भी आगाह किया कि निवेशकों को अत्यधिक उत्साह में जोखिम उठाने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, जिन कारणों ने चांदी के दाम को ऊपर पहुंचाया, वे 2026 में स्थिर हो सकते हैं। ऐसे परिदृश्य में बाजार में 30–35 प्रतिशत तक की गिरावट भी संभव है।
अजय केडिया का कहना है कि यदि कीमतों में तेज सुधार आता है, तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है। खासकर छोटे निवेशकों के लिए उन्होंने सलाह दी कि वे सीधे खरीदारी करने की बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए सिल्वर ईटीएफ में एसआईपी (Systematic Investment Plan) का विकल्प चुनें। इससे उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है और समय के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना बनी रहती है।
सार यह है कि चांदी के बाजार में अभी भी मजबूत संभावनाएँ मौजूद हैं, लेकिन साथ में अस्थिरता भी बनी रह सकती है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाज़ी में फैसला लेने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता, निवेश का समय और वित्तीय सलाह को ध्यान में रखकर ही कदम उठाना चाहिए।

