IndusInd Bank की अकाउंटिंग पर SFIO की सख्ती, अनियमितताओं को लेकर भेजे जाएंगे औपचारिक सवाल

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IndusInd Bank News: निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बैंक ने शुक्रवार को जानकारी दी कि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने इस सप्ताह बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की है और अकाउंटिंग से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर जल्द ही लिखित रूप में विस्तृत सवाल भेजे जाएंगे। SFIO कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के अधीन काम करने वाली एक शीर्ष जांच एजेंसी है।

RBI के निर्देशों के तहत SFIO को दी गई जानकारी

इंडसइंड बैंक ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 15 जुलाई 2024 के मास्टर निर्देशों के अनुसार, ₹1 करोड़ या उससे अधिक की किसी भी धोखाधड़ी या वित्तीय अनियमितता की जानकारी RBI के साथ-साथ SFIO को देना अनिवार्य होता है। इसी प्रावधान के तहत बैंक ने 2 जून 2025 को SFIO को कुछ अहम जानकारियां साझा की थीं।

इनमें बैंक के आंतरिक डेरिवेटिव ट्रेड्स की अकाउंटिंग, ‘अन्य परिसंपत्तियों’ और ‘अन्य देनदारियों’ में दर्ज कुछ अप्रमाणित बैलेंस, तथा माइक्रोफाइनेंस कारोबार से जुड़ी ब्याज और शुल्क आय में पाई गई गड़बड़ियां शामिल थीं।

MCA के आदेश पर शुरू हुई जांच

इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में कहा गया था कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने वैधानिक ऑडिट और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट्स के आधार पर इंडसइंड बैंक में अकाउंटिंग से जुड़ी गंभीर खामियों को देखते हुए SFIO को औपचारिक जांच के निर्देश दिए थे। इन रिपोर्ट्स में जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों की ओर इशारा किया गया था।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) धन के डायवर्जन या गबन से जुड़े ठोस सबूत न मिलने के कारण अपनी प्रारंभिक जांच बंद करने की तैयारी में है।

Q4FY25 में भारी घाटा

इंडसइंड बैंक ने जनवरी–मार्च 2025 तिमाही में ₹2,329 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया। यह घाटा मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर किए गए प्रावधानों और डेरिवेटिव व माइक्रोफाइनेंस से जुड़ी गलत तरीके से दर्ज की गई आय को वापस लेने के कारण हुआ।

मार्च में हुआ था अनियमितताओं का खुलासा

मार्च 2025 में बैंक ने खुलासा किया था कि उसकी आंतरिक समीक्षा में डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गंभीर खामियां सामने आई हैं। इसके बाद कराई गई बाहरी जांच में पता चला कि FY16 से FY24 के बीच कई डेरिवेटिव लेनदेन का अकाउंटिंग ट्रीटमेंट तय मानकों के अनुरूप नहीं था।

जांच में यह भी सामने आया कि कई वर्षों तक काल्पनिक (नोशनल) आय को लाभ-हानि खाते में दिखाया गया और उससे जुड़ी राशि को परिसंपत्तियों के रूप में दर्ज किया गया। बैंक ने FY25 में ऐसी ₹1,959.98 करोड़ की संचित नोशनल आय को पूरी तरह लिख-ऑफ किया। साथ ही, ‘अन्य परिसंपत्तियों’ और ‘अन्य देनदारियों’ में मौजूद ₹595 करोड़ के अप्रमानित बैलेंस का भी समायोजन किया गया।

माइक्रोफाइनेंस आय में भी अनियमितताएं

माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो की समीक्षा में यह भी सामने आया कि ₹673.82 करोड़ की ब्याज आय और ₹172.58 करोड़ की शुल्क आय को गलत तरीके से मान्यता दी गई थी। इन प्रविष्टियों को वापस लेने से Q4FY25 के नतीजों पर ₹422.56 करोड़ का नकारात्मक असर पड़ा।

इसके अलावा, कुछ माइक्रोफाइनेंस लोन को गलत तरीके से स्टैंडर्ड एसेट के रूप में वर्गीकृत किया गया था। वर्गीकरण सही करने के बाद बैंक ने इन लोन पर 95 प्रतिशत का प्रावधान किया, जिसकी राशि ₹1,791 करोड़ रही। इससे 31 मार्च 2025 तक कुल ₹1,969 करोड़ का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

शीर्ष प्रबंधन के इस्तीफे

इस पूरे प्रकरण के बाद बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ सुमंत कथपालिया और पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में करीब ₹1,960 करोड़ के नुकसान की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। मौजूदा प्रबंधन इन अधिकारियों को दिए गए बोनस की रिकवरी (क्लॉबैक) के लिए भी कदम उठा रहा है।