Govt Jobs: महाराष्ट्र की चार प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों की स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। राज्य सरकार ने विधान परिषद में बताया कि इन संस्थानों में शिक्षण और गैर-शिक्षण श्रेणी के कुल 7,199 पद रिक्त हैं। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ न होने के बावजूद कामकाज मौजूदा कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के सहारे चलाया जा रहा है।
मंत्री भरणे के अनुसार, अकोला स्थित डॉ. पं. देशमुख कृषि विद्यापीठ में सबसे ज्यादा 2,235 पद खाली हैं, जबकि राहुरी के महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, परभणी के वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ और दापोली के डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां बनी हुई हैं।
रिसर्च और शिक्षा की गुणवत्ता पर उठे सवाल
विधान परिषद में विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि क्या हजारों पद खाली होने से पढ़ाई, रिसर्च और विश्वविद्यालयों की एक्सटेंशन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस पर कृषि मंत्री ने माना कि पद तो रिक्त हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों में मौजूद शिक्षक, प्रशासनिक स्टाफ और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मदद से काम जारी है।
फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अध्यापक और तकनीकी कर्मचारियों की कमी से छात्रों की शिक्षा, नई फसली किस्मों का विकास, तथा किसानों तक तकनीक पहुंचाने की योजनाओं पर असर पड़ रहा है।
विभागीय मंजूरी के बाद शुरू होगी भर्ती
कृषि मंत्री भरणे ने बताया कि चारों विश्वविद्यालयों में खाली पदों का विस्तृत डेटा एकत्रित किया जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्तियों का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा। विभागीय मंजूरी मिलते ही नियमों के अनुसार भर्ती शुरू की जाएगी।
विपक्ष द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
जल जीवन मिशन को फंड न मिलने पर भी चिंता
सत्र के दौरान एक अलग मुद्दे पर जल आपूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने बताया कि अक्टूबर 2024 के बाद से जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से कोई फंड जारी नहीं हुआ है। इसके चलते राज्य सरकार को अपने संसाधनों से प्रोजेक्ट पूरे करने पड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि
-
कुल 51,560 योजनाओं में से 25,429 अभी भी अधूरी हैं।
-
फंड की कमी, भूमि उपलब्ध न होना, स्थानीय विरोध और मंजूरियों में देरी की वजह से निर्माण कार्य धीमा पड़ा है।
-
लापरवाही पर 67 ठेकेदार ब्लैकलिस्ट किए गए हैं और 188 ठेकों को रद्द किया गया है।
-
कई इंजीनियरों और कंसल्टेंट्स को नोटिस भी भेजे गए हैं।
सरकार का कहना है कि जल्द ही प्रक्रियाओं में तेजी लाने के कदम उठाए जाएंगे।

