समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री Azam Khan को गुरुवार को एक बड़ा कानूनी राहत भरा फैसला मिला। रामपुर की एमपी–एमएलए कोर्ट ने उन्हें वर्ष 2017 में सेना के जवानों पर विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। यह मामला लगभग आठ साल से अदालत में लंब लंबित था।
यह केस 2017 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा था। आरोप था कि आज़म ख़ान ने अपनी जनसभा में भारतीय सेना के जवानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे न सिर्फ सेना का अपमान हुआ बल्कि समाज में तनाव भी पैदा हो सकता था। इस पर 30 जून 2017 को बीजेपी नेता और वर्तमान रामपुर सदर विधायक आकाश सक्सेना ने थाना सिविल लाइंस में एफआईआर दर्ज कराई थी। मामला आईपीसी की धारा 153ए (वैमनस्य फैलाना) और धारा 505 (अफवाह व उत्तेजक बयान) के तहत दर्ज हुआ था।
करीब आठ वर्षों तक गवाहों के बयान, दस्तावेज़ और सबूतों की जांच के बाद गुरुवार को अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आज़म ख़ान ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया, जिसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य फैलाना या सेना का मनोबल गिराना हो। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त और पुख्ता सबूत न होने की वजह से आज़म ख़ान को सभी आरोपों से बरी किया जाता है।
27 जून 2017 का वो बयान
आरोप के अनुसार, जनसभा के दौरान आज़म ख़ान ने कहा था:
“हथियारबंद औरतों ने फौज को मारा। दहशतगर्द फौजियों के प्राइवेट पार्ट्स काटकर ले गए… जिस हिस्से से उन्हें शिकायत थी, उसे ही काटकर ले गए… ये इतना बड़ा संदेश है कि पूरे हिंदुस्तान को शर्मिंदा होना चाहिए।”
यह बयान उस समय काफी विवादों में रहा और राजनीति में बड़ा मुद्दा बना।
क्वालिटी बार जमीन कब्जा मामला: 4 जनवरी को अगली सुनवाई
हालांकि इस केस में राहत मिलने के बावजूद आज़म ख़ान के सामने एक और बड़ा मामला अभी भी लंबित है—क्वालिटी बार भूमि आवंटन से जुड़ा केस। यह मामला 21 नवंबर 2019 को राजस्व निरीक्षक अनंग राज सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
आरोप है कि मंत्री रहते हुए आज़म ख़ान ने जिला सहकारी संघ की 302 वर्गमीटर जमीन—जिस पर क्वालिटी बार बना है—अपनी पत्नी को मात्र 1200 रुपये किराये पर अलॉट करा दी। बाद में उनके बेटे को भी सह-किरायेदार बना दिया गया। अभियोजन के अनुसार, यह आवंटन नियमों के विरुद्ध था और पद का दुरुपयोग किया गया।
यह मामला भी एमपी–एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है, और 4 जनवरी को इसमें आरोप तय किए जा सकते हैं। इस वजह से आज़म ख़ान की कानूनी चुनौतियाँ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, हालांकि आज का फैसला उनके लिए एक बड़ी राहत है।

