LIC Stake Sale: केंद्र सरकार ने बाजार की कमजोर स्थिति और निवेशकों की सतर्कता को ध्यान में रखते हुए एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) की हिस्सेदारी बिक्री योजना में बदलाव किया है। पहले जहां 2.5–3% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी थी, वहीं अब इसे घटाकर 1–2% स्टेक तक सीमित किया जा सकता है। यह बिक्री चालू वित्त वर्ष 2025–26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से की जा सकती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा बाजार परिस्थिति में बड़े हिस्से की बिक्री निवेशकों को आकर्षित नहीं कर रही है। अनुमान है कि 1–2% हिस्सेदारी बेचने से सरकार को ₹13,000–14,000 करोड़ तक की राशि मिल सकती है, जबकि 3% हिस्सेदारी से यह आंकड़ा करीब ₹24,000 करोड़ तक जा सकता था। हालांकि, मांग कम होने के कारण सरकार को स्टेक साइज घटाना पड़ रहा है।
LIC को SEBI से मिली बड़ी छूट
वर्तमान में एलआईसी में जनता की हिस्सेदारी मात्र 3.5% है। SEBI ने कंपनी को 16 मई 2027 तक इसे बढ़ाकर 10% सार्वजनिक हिस्सेदारी करने की विशेष अनुमति दी है। इसके बाद 2032 तक कंपनी को 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के मानक का पालन करना होगा। फिलहाल सरकार के पास एलआईसी का 96.5% स्वामित्व है।
बाजार पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव
₹6 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली एलआईसी देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनियों में से एक है। इसलिए हिस्सेदारी बिक्री:
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शेयर बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाएगी
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फ्री-फ्लोट में सुधार लाएगी
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इंडेक्स वेटेज और स्टॉक प्राइस पर असर डाल सकती है
2022 के IPO के बाद पहली स्टेक सेल
यह बिक्री 2022 में आए एलआईसी के ऐतिहासिक IPO के बाद सरकार द्वारा की जाने वाली पहली हिस्सेदारी बिक्री होगी। तब से अब तक सरकार ने अपने किसी भी शेयर का विनिवेश नहीं किया है।
रिटेल निवेशकों की कमजोर दिलचस्पी
अक्टूबर–नवंबर 2025 के बीच रिटेल निवेशकों ने करीब ₹25,300 करोड़ के शेयरों की बिक्री की है। वैश्विक अस्थिरता और मुनाफावसूली के बीच जहां रिटेल निवेशक सतर्क दिखे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और म्यूचुअल फंड बाज़ार में नेट ख़रीदार बने हुए हैं।
सरकार की नई स्टेक सेल योजना से एलआईसी के शेयर प्रदर्शन और बाजार की चाल दोनों पर नज़रें टिकी हुई हैं।

