Women Health: सर्दियों के कपड़े महिलाओं के हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकते हैं!

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Women Health: सर्दियां आते ही महिलाएं जैकेट, इनर और गर्म ऊनी कपड़ों की खरीदारी में जुट जाती हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इन गर्म कपड़ों में उपयोग किए जाने वाले डाई, फिनिशिंग एजेंट और वॉटर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स में ऐसे रसायन मौजूद हो सकते हैं जो हार्मोनल सिस्टम पर बुरा असर डालते हैं। इन्हें एंडोक्राइन डिसरप्टर्स कहा जाता है—ऐसे केमिकल्स जो एस्ट्रोजन की नकल करते हैं या उसकी प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।

मेनोपॉज़ कोच तमन्ना सिंह के अनुसार, मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं का हार्मोनल संतुलन पहले ही अधिक संवेदनशील होता है। ऐसे में कपड़ों के रसायन शरीर के प्राकृतिक संतुलन को और अधिक बिगाड़ सकते हैं, जिससे हॉट फ्लैश, मूड स्विंग्स, थकान, त्वचा की ड्राइनेस जैसे लक्षण बढ़ने लगते हैं।

ये रसायन खासकर सिंथेटिक फाइबर, वॉटरप्रूफ जैकेट्स और रंग टिकाने वाले कपड़ों में पाए जाते हैं। सर्दियों में जब इनका उपयोग लंबे समय तक होता है, तो ये त्वचा के संपर्क में रहकर धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।


इन केमिकल्स से कैसे बचें?

प्राकृतिक फैब्रिक पहनें

100% कॉटन, ऊन या बांस (Bamboo) जैसे नैचुरल फैब्रिक अधिक सुरक्षित होते हैं।

नए कपड़े पहले धोएं

नए कपड़ों को पहनने से पहले एक बार धोना जरूरी है ताकि सतही रसायन हट जाएं।

सिंथेटिक कपड़ों से दूरी

बहुत टाइट या लंबे समय तक सिंथेटिक फाइबर न पहनें।

वेंटिलेशन बनाए रखें

कमरे में सही वेंटिलेशन होने से केमिकल-युक्त कणों का प्रभाव कम होता है।

सर्दियों की गर्माहट देने वाले ये कपड़े कभी-कभी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। थोड़ी जागरूकता और सही फैब्रिक का चुनाव हार्मोनल असंतुलन को काफी हद तक रोक सकता है।