दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए भीषण विस्फोट, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, उसकी जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। इस सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को Al Falah University के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। माना जा रहा है कि इस गिरफ्तारी से ब्लास्ट में शामिल संदिग्ध मॉड्यूल की गतिविधियों पर महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
अल फलाह यूनिवर्सिटी पर क्यों टूटी जांच की गाज?
फरीदाबाद के धौज में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी हाल ही में पकड़े गए एक ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर मॉड्यूल से जुड़े होने के संदेह के बाद निगरानी में आई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मॉड्यूल दिल्ली ब्लास्ट की साजिश को आगे बढ़ाने वाले नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी वजह से विश्वविद्यालय की फंडिंग, लेनदेन और संबंधित संस्थाओं की गहन जांच शुरू की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल की विशेषता यह थी कि इसमें शामिल लोग सीधे आतंकी पृष्ठभूमि से नहीं थे, बल्कि दिखने में साधारण पेशेवर और शिक्षाविद थे, जिसके चलते इसे ‘व्हाइट-कॉलर मॉड्यूल’ कहा गया। यह नेटवर्क कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों को वैध कामकाज की आड़ में वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा था।
ED की छापेमारी और अहम सुराग
ED ने स्पष्ट किया है कि जवाद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी यूनिवर्सिटी परिसर और संबंधित ठिकानों पर किए गए सर्च ऑपरेशन से मिले दस्तावेज़ों और डिजिटल सबूतों के विस्तृत विश्लेषण के बाद की गई है। शुरुआती जांच में मिले कई लेनदेन, संदिग्ध खातों और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग पैटर्न ने जांच एजेंसी का शक और गहरा किया।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, जब्त किए गए दस्तावेज़ और सिस्टम लॉग यह संकेत देते हैं कि कुछ वित्तीय गतिविधियां जानबूझकर छिपाई गई थीं और उनका उपयोग संभावित रूप से टेरर फंडिंग में किया गया। एजेंसी अब इन लेनदेन से जुड़े सभी व्यक्तियों और संस्थानों की जानकारी खंगाल रही है।
अगले कदम
ED जवाद सिद्दीकी से पूछताछ कर ब्लास्ट मॉड्यूल के संभावित आर्थिक नेटवर्क, सहयोगियों और विदेशी लिंक की जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी। इस गिरफ्तारी को जांच एजेंसियां दिल्ली ब्लास्ट मामले में बड़ा ब्रेकथ्रू मान रही हैं।

