Ganesh Mantra : आने वाले बुधवार यानि कि 19 नवंबर को अगहन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या तिथि है, जो कि वैदिक पंचांग के अनुसार बेहद शुभ घडी है।जैसा कि हम सब जानते है कि बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा बड़े भक्ति भाव से की जाती है तथा मनचाही मुराद पाने के लिए इस दिन व्रत भी रखा जाता है।
धार्मिक मान्यतों के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होने के साथ साथ आर्थिक समस्याओं का निदान भी मिलता है, जिससे दरिद्रता दूर होती है । ऐसे में आस्थावान व्यक्ति बुधवार के दिन बड़े भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा कर भगवान गणेश की कृपा के भागी होना चाहते हैं ।
वैसे तो भगवान गणेश मात्र मोदक और लड्डू के भोग से ही प्रसन्न हो जाते है परन्तु यदि इस दिन आप कुछ गणेश मंत्रो का जाप करे तो भगवान गणेश की कृपा आप पर बरसने लगेगी । हम आज अपने पाठको को वो मन्त्र बताने जा रहे है जिनके जप मात्र से आप भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति कर सकते है । वो मन्त्र है :-
- ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥ - ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
- ‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।। - ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
- दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥ - ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।
- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा ।
- गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित् ।
इसके अलावा आप भगवान गणेश की आरती भी कर सकते है, जो इस प्रकार है :-
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश…
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश…
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश…
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश…
नोट : ये लेख पूर्णतया हिन्दू धर्म की मान्यतों पर आधारित है तथा जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। ऐसे में “खास रपट” इस लेख में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।

